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2.7.2026 आज जो संसार के लोग दुखी अशांत अथवा किसी भी प्रकार से परेशान हैं, *"उनके दुखों में सबसे अधिक बड़ा कारण उनकी अपनी इच्छाओं का है।"* लोग अंधाधुंध भोगों को भोगते जा रहे हैं।अपनी इच्छाओं को पूरा करने के प्रयास में लगे हैं। परंतु वे इस बात को नहीं समझ रहे कि *"जैसे आग में पैट्रोल डालने से आग बढ़ती है, ऐसे ही वे जितनी जितनी इच्छाएं पूरी करेंगे, उतनी उतनी वे बढ़ती जाएंगी।"* और किसी भी व्यक्ति की भौतिक सुख भोगने की सारी इच्छाएं कभी भी पूरी नहीं हो पाती। *"कुछ इच्छाएं पूरी हो जाती हैं और कुछ रह जाती हैं। वे इच्छाएं जो पूरी नहीं हो पाती, वही दुख देती हैं।"* इसलिए दुख से बचने का यही सबसे उत्तम उपाय है कि *"अपनी इच्छाओं पर नियंत्रण करें। जहां तक संभव हो अपनी इच्छाओं को कम करें।"* और जितनी भी इच्छाएं अपने मन में रखें, उनके विषय में सदा दो विचार रखें, कि *"हमारी इच्छाएं पूरी हो भी सकती हैं और नहीं भी।"* जब ये दोनों संभावनाएं हैं, तो दोनों मन में रखनी चाहिएं। अधिकतर लोग केवल एक ही संभावना मन में रखते हैं। वे सोचते हैं *"मेरी ये इच्छाएं तो पूरी हो ही जाएंगी। अथवा हर हालत में पूरी होनी ही चाहिएं।"* बस यही उनके दुखों का बहुत बड़ा कारण है। जब दोनों संभावनाएं हैं, तो दोनों ही मन में रखनी चाहिएं। और इस प्रकार से सोचना चाहिए, कि *"यदि मेरी इच्छा पूरी हो गई, तो ठीक है. और यदि पूरी नहीं हुई, तो अपने मन को समझा लेवें और अपने आप से कहें "कोई बात नहीं।" "आज यह इच्छा पूरी नहीं हो पाई, तो फिर कभी पूरी कर लेंगे।" "ऐसा कहने से आपका मन शांत हो जाएगा, और सारा दुख समाप्त हो जाएगा।"* ---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक निदेशक दर्शन योग महाविद्यालय रोजड़ गुजरात।"*

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