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*होली का संकल्प : रंग सिर्फ चेहरे पर नहीं, समाज और संस्कृति की रक्षा में भी!* 🤜 #BoycottAntiHinduProducts 2 मिनट समय निकालकर #Thread अंत तक अवश्य पढ़े।🧵👇 🔏 लेखक : पंकज सनातनी होली आ रही है। रंगों का त्योहार, प्रेम का उत्सव, होलिका दहन की ज्वाला में बुराई का अंत... लेकिन इस बार रंग सिर्फ़ चेहरे पर नहीं, हमारे खून में भी चढ़ने चाहिए। क्योंकि अब समय आ गया है कि हम जागरूक हों, एकजुट हों और अपनी संस्कृति, अपनी आस्था तथा अपने समाज की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाएं। कई वर्षों से हम देखते और सुनते आ रहे हैं कि हमारे त्योहारों पर कमाई करने वाले मुस्लिम व्यापारी और कट्टरपंथी जिहादी, जो पीठ पीछे हमारी हिंदू संस्कृति को गालियाँ देते हैं, हमारे देवी-देवताओं का मजाक उड़ाते हैं, हिंदू लड़कियों को लव-जिहाद में फंसाने की साजिश रचते हैं, और उसी कमाई से मस्जिदों-मदरसों में जिहादी एजेंडे को फंड करते हैं। कुछ मौलानाओं द्वारा होली को हराम घोषित कर फतवे भी जारी किए जाते हैं, होली के रंगों में जहरीले केमिकल या कांच के टुकड़े मिलाने की वास्तविक घटनाएं भी सामने आती हैं। कई जगहों पर होली शोभायात्राओं पर पथराव, हमले और हिंसा की अनेकों घटनाएं दर्ज हुई हैं। मगर फिर भी वही लोग हमारे त्योहारों के समय दुकानें सजाकर मुनाफा कमाते हैं और उस पैसे से हमारी आस्था के खिलाफ प्रचार और साजिशें चलाते रहते हैं। होली सिर्फ रंग खेलने का त्योहार नहीं है। यह हमारे रिश्तों को मजबूत करने, संस्कृति को जीवंत रखने और समाज में प्रेम, भाईचारा तथा एकता का संदेश देने का पावन अवसर है। इस पवित्र पर्व पर हमें यह भी याद रखना चाहिए कि हमारी हर खरीदारी एक समर्थन है। हम जहां पैसा लगाते हैं, वहां शक्ति पहुंचती है। इसलिए इस होली पर संकल्प लें कि हमारी खरीदारी अपने हिंदू भाइयों-बहनों से ही होगी। दुनिया के हर समुदायों में यह परंपरा है कि त्योहारों के समय लोग अपने ही समाज के व्यापारियों को प्राथमिकता देते हैं। मुस्लिम समुदाय रमजान और ईद पर अपने दुकानदारों से खरीदारी की अपील करता है, क्रिश्चियन क्रिसमस और ईस्टर पर अपने लोगों के व्यापार को बढ़ावा देते हैं। इसका मकसद सिर्फ व्यापार नहीं, बल्कि समुदाय को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना होता है। हमें भी यही समझना होगा। हमारा पैसा हमारी ताकत है। यदि हम होली के रंग, गुलाल, मिठाई, कपड़े, पिचकारियां, गुब्बारे और अन्य सामान स्थानीय हिंदू दुकानदारों, छोटे व्यापारियों और स्वदेशी उत्पादकों से खरीदेंगे, तो न सिर्फ उनका व्यापार फलेगा-फूलेगा, बल्कि हमारा समाज भी आर्थिक रूप से मजबूत बनेगा। और समाज तभी मजबूत होता है जब उसके लोग एक-दूसरे का साथ देते हैं। यदि हम अपने ही त्योहारों पर अपने लोगों का साथ नहीं देंगे, तो फिर कब देंगे ? अतः इस होली समस्त हिन्दू समाज एक छोटा लेकिन महत्वपूर्ण संकल्प लें : - खरीदारी केवल अपने हिंदू व्यापारियों से करें। - ऐसे उत्पादों और विक्रेताओं से दूरी बनाएं जो हमारी आस्था का अपमान करते हैं, हमारे त्योहारों का मजाक उड़ाते हैं या हमारे खिलाफ साजिशों में शामिल रहते हैं। - जहरीले या संदिग्ध रंगों से बचें, प्राकृतिक और सुरक्षित गुलाल चुनें जो हमारे अपने लोग बनाते हैं। आइए इस होली केवल रंगों से नहीं, बल्कि जागरूकता, एकजुटता, अपनेपन और आर्थिक स्वावलंबन से समाज को रंग दें। अपने त्योहारों की गरिमा बनाए रखें, अपने छोटे-बड़े व्यापारियों का साथ दें और हिंदू समाज को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में योगदान दें। एक छोटा संकल्प, बड़ा बदलाव लाएगा। अपनों का साथ दें, क्योंकि हमारा पैसा हमारी ताकत है। अतः इस होली को रंगों से नहीं, एकजुटता से रंगें। "अपनी खरीदारी अपनों से करें 🙏⛳🚩* ▬▬▬▬▬๑⁂❋⁂๑▬▬▬ *जनजागृति हेतु लेख प्रसारण अवश्य करें॥* _यस्य पुत्रो वशीभूतो भार्या छन्दानुगामिनी।_ _विभवे यस्य सन्तुष्टिस्तस्य स्वर्ग इहैव हि।।_ *प्रशासक समिति ®️✊🚩* _एकात्मिता सोशल वेल्फेयर सोसाइटी_

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