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🌸🌸 *श्रीहरि:* 🌸🌸 *द्यावापृथिव्योरिदमन्तरं हि व्याप्तं त्वयैकेन दिशश्च सर्वाः ।* *दृष्ट्वाद्भुतं रूपमुग्रं तवेदं लोकत्रयं प्रव्यथितं महात्मन् ॥* _हे महात्मन् ! यह स्वर्ग और पृथ्वी के बीच का अन्तराल और सम्पूर्ण दिशाएँ एक आपसे ही परिपूर्ण हैं। आपके इस अद्भुत और उग्ररूप को देखकर तीनों लोक व्यथित (व्याकुल) हो रहे हैं।_ नारायण! नारायण!! नारायण!!!u

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