
SHREE SHARMA
174 days ago
🙏🌹*संत*🌹🙏 एक मारबाड़ी सेठ बरसाने गया ,उसको कुछ दिन बरसाना रुकना था। उसका एक नियम था। 🙏❤️भोजन करने से पहले किसी संत को भोजन कराता था फिर स्वयम करता था। ❤️🙏 एक दिन भोजन का समय था , सेठ ने नौकर भेजे जाओ संत बुला कर लाओ। उस दिन श्री जी की ऐसी इच्छा हुई जिसके कारण कही बहुत बड़ा भंडारा था सारे संत भंडारे में चले गये। बरसाने में कोई संत नहीं मिला। श्री जी मंदिर कि सीढ़ी पर एक पागल सा बीड़ी पीं रहा था। नौकरो ने सोचा ना संत मिलेगा ना सेठ भोजन करेगा ना हमको करने देगा। एक दो लाल पीले कपडे बाजार से लिए और एक उस पागल के गले में उड़ा दिया एक उसके सर पे पहना दिया, और उसका तिलक कर दिया और उसको कहा के तू संत है। हमारे सेठजी अच्छी दक्षिणा देते है। सेठजी के सामने कुछ मत बोलना हम कह देंगे के मोनी बाबा है। उसको सेठजी के पास ले गए। सेठ जी ने उसको बैठाया चरण धोये, थाल सजाया. अभी गरम हलुआ परोसा ही था , वो बेचारा था मांगने वाला भिखारी जैसे ही हलुआ देखा उठा के खाने लगा सेठ ने कहा तू खड़ा हो जा तू नकली है तू संत नहीं है l संत जब भोजन करते है पहले प्रार्थना करते है उसके बाद भोजन पाते है। उसको भगा दिया वो भूखा रोता रहा। सेठजी ने प्रार्थना की श्री जी मैंने अपनी पूरी कोशिश कर ली l उसके बाद सेठजी ने भोजन कर लिया। भिखारी भूखा रोता रहा। रात को सेठ के सपने में किशोरी जू आयी , किशोरी जू ने कहा , '' उसको भूखा उठा दिया बहुत बड़ा दानवीर बनता है. सेठ ने कहा ,'' महारानी वो संत नहीं था वो पाखंडी था l किशोरी जु ने कहा ,'' सेठ एक दिन खिलाना पड़ गया तो संत का संत तत्व देख रहा है। में उस पाखंडी को चालीस साल से खिला रही हु ,, वो आज तक भूखा नहीं सोया मैंने तो आज तक पूछा नहीं के वो संत है या पाखंडी है ।...... विशेष,,,,,, हर जीवात्मा में आत्मा के रूप मे परमात्मा की सत्ता विद्यमान है l अतः प्राणियों की सेवा ईश्वर की श्रेष्ठ आराधना है l प्राणियों में भेदभाव करना ईश्वर की अवमानना है l परन्तु यह भी सही है कि श्रेष्ठ जीवात्माओं की सेवा से मिलने वाला 🙏🌹पुण्य 🌹🙏भी श्रेष्ठ होता है l गौमाता एवं पीपल की सेवा जहां देवों को प्रसन्न करने से उनकी कृपा प्राप्त होती है वहीं वह कृपा 🙏🌹ज्ञान और सुख समृद्धि🌹🙏 देने वाली है l 🌹🙏राधे राधे🙏🌹

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