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SHREE SHARMA

377 days ago

🐍 शिवजी🌹वही तत्व है जो समस्त प्राणियों के विश्राम का स्थान है। स्वजनों,, मूलत: शिव जी 🙏 एवं विष्णु जी 🙏 एक ही हैं, फिर भी उनके उपर रूप में सत्व के योग से विष्णु जी 🙏 को सात्विक और तम के योग से रूद्र को तामस कहा जाता है। सत्वनियंता विष्णु जी 🙏 और तमनियंता रूद्र हैं। तम ही मृत्यु है, काल है। सज्जनों,, अत: उसके नियंता महामृत्युंजय महाकालेश्वर भगवान रूद्र हैं। तम प्रधान प्रलयावस्था से ही सर्व प्रपंच की सृष्टि होती हैं। श्रीकृष्णजी के भक्त तम को बहुत ऊँचा स्थान देते हैं। जब सृष्टिकाल के उपद्रवों से जीव व्याकुल हो जाता है, तब उसको दीर्घ सुषुप्ति में विश्राम के लिए भगवान सर्वसंहार करके प्रलयावस्था व्यक्त करते हैं। यह संसार भी भगवान की कृपा ही है। तम प्रधानावस्था है, उसी से उत्पादनावस्था और पालनावस्था व्यक्त होती है। अन्त में फिर भी सबको प्रलयावस्था में जाना पड़ता है। उत्पादनावस्था के नियामक ब्रह्माजी, पालनावस्था के नियामक विष्णुजी और संहारावस्था एवं कारणावस्था के नियामक शिव जी 🙏 हैं। पहले भी कारणावस्था रहती हैं, अंत में भी वही रहती है। प्रथम भी शिवजी हैं, अंत में भी शिव तत्व ही अवशिष्ट रहता है। तत्वज्ञ लोग उसी में आत्म-भाव करते हैं। शिव जी 🙏 ही सर्वविद्याओं एवं भूतों के ईश्वर हैं, वही महेश्वर हैं, वही सर्वप्राणियों के हृदय में रहते हैं। एकादश प्राण रूद्र हैं। निकलने पर वे प्राणियों को रूलाते हैं, इसलिए रूद्र कहे जाते हैं। दस इन्द्रियां और मन ही एकादश रूद्र हैं। ये आध्यात्मिक रूद्र हैं। आधिदैविक एवं सर्वोपाधिविनिर्मुक्त रूद्र इनसे पृथक हैं। जैसे विष्णु पाद के अधिष्ठाता हैं, वैसे ही रूद्र अहंकार के अधिष्ठाता हैं। शिवजी की आत्मा विष्णुजी और विष्णुजी की आत्मा शिवजी हैं। तम काला होता है और सत्व शुक्ल परन्तु परस्पर एक- दूसरे की ध्यानजनित तन्मयता से दोनों के ही स्वरूप में परिवर्तन हो गया अर्थात सतोगुणी विष्णु कृष्णवर्ण हो गए और तमोगुणी रूद्र शुक्लवर्ण हो गए। श्री राधाजी रूप से श्री शिवजीरूप का प्राकट्य होता है, तो कृष्णजीरूप से विष्णुजी का, काली रूप से विष्णुजी का तो शंकरजीरूप से शिवजी का। कालकूट विष और शेषनाग को गले में धारण करने से भगवान की मृत्युंजयरूपता स्पष्ट है। जटामुकुट में श्रीगंगाजी को धारण कर विश्व मुक्ति मूल को स्वाधीन कर लिया। अग्निमय तृतीय नेत्र के समीप में ही चन्द्रकला को धारण कर अपने संहारकत्व-पोषकत्व स्वरूप विरूध्द धर्माश्रयत्व को दिखलाया। सर्वलोकाधिपति होकर भी विभूति और व्याघ्रचर्म को ही अपना भूषण- बसन बनाकर संसार में वैराग्य को ही सर्वापेक्षया श्रेष्ठ बतलाया। शिवजी का वाहन नंदीजी , तो उमा जी 🙏 का वाहन सिंह , गणपति जी 🙏 का मूषक, तो कार्तिकेय जी 🙏 का वाहन मयूर है। मूर्तिमान त्रिशूल और भैरवादिगण आपकी सेवा में सदा संलग्न हैं। सुर, नर, मुनि, नाग ,गन्धर्व, किन्नर, असुर, दैत्य भूत , पिशाच, वेताल, डाकिनी, शाकिनी, वृश्चिक, सर्प, सिंह सभी उनको पूजते हैं। आक, धतूरा, अक्षत, बेलपत्र, जल से उनकी पूजा की जाती है। शिवजी का कुटुम्ब भी विचित्र ही है। अन्नपूर्णा का भण्डार सदा भरा, पर भोले बाबा जी 🙏 सदा के भोले भंडारी। कार्तिकेय जी 🙏 सदा युध्द के लिए उध्दत, पर गणपति जी 🙏 स्वभाव से ही शांतिप्रिय। कार्तिकेय जी 🙏 का वाहन मयूर, गणपति जी 🙏 का मूषक, पार्वतीजी का सिंह और शिवजी का नंदी, उस पर सर्पों का आभूषण। सभी एक दूसरे के शत्रु ,पर गृहपति की छत्रछाया में सभी सुख तथा शांति से रहते हैं। घर में प्राय: विचित्र स्वभाव और रूचि के लोग रहते हैं। घर की शांति के आर्दश की शिक्षा भी शिव जी 🙏 से ही मिलती है। भगवान शिवजी और अन्नपूर्णा देवी जी 🙏 अपने आप परम विरक्त रहकर संसार का सब ऐशवर्य श्री विष्णुजी और लक्ष्मीजी को अर्पण कर देते हैं। श्री लक्ष्मीजी और श्रीविष्णुजी भी संसार के सभी कार्यां को संभालने, सुधारने के लिए अपने आप ही अवर्तीण होते है।

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Comments (4)

SHREE SHARMA

SHREE SHARMA

Aug 18, 2025

🙏🌹🙏🙏

SHREE SHARMA

SHREE SHARMA

Aug 18, 2025

🙏🙏🌹🌹

Saumya Sharma

Saumya Sharma

Aug 18, 2025

हर हर महादेव 🙏 जय शिव शक्ति 🙏 शुभ रात्रि विश्राम भैया जी 🙏🌹😊करता करे न कर सके, शिव करे सो होय, तीन लोक नौ खंड में शिव से बड़ा न कोइ 🙏🌹😊 बाबा भोलेनाथ और मां आदिशक्ति की कृपा आप सपरिवार पर सदैव ही बनी रहे 🙏🌹😊

Deepak  karki

Deepak karki

Aug 18, 2025

शुभ सोमवार सोमवार सुबह कि ॐ नमः शिवाय हर हर महादेव 🌹🙏