
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
16 hours ago
रिश्तों की दीवार अपनों से फासले बढ़ाना, कोई समझदारी नहीं, दीवारें खींचकर जीने में, कोई आज़ादी नहीं। आज गर गुरूर में तूने, हर रिश्ता तोड़ दिया, अपनों का साथ छोड़, अकेला खुद को छोड़ दिया। याद रख, वक्त का पहिया कभी तो घूमेगा ज़रूर, अपनों की ही चाहत में, दिल फिर से झूमेगा ज़रूर। पर जब चारों तरफ़ नजरें, तू अपनों को ढूंढेगा, तब यह खुद की बनाई दीवार, तुझे रोकेगा। इसलिए दिलों के बीच कभी न ऐसी दीवार तान, अपनों के बिना अधूरा है, इस जीवन का हर अरमान।

Comments (0)
No comments yet. Be the first to comment!
