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रिश्तों की दीवार ​अपनों से फासले बढ़ाना, कोई समझदारी नहीं, दीवारें खींचकर जीने में, कोई आज़ादी नहीं। ​आज गर गुरूर में तूने, हर रिश्ता तोड़ दिया, अपनों का साथ छोड़, अकेला खुद को छोड़ दिया। ​याद रख, वक्त का पहिया कभी तो घूमेगा ज़रूर, अपनों की ही चाहत में, दिल फिर से झूमेगा ज़रूर। ​पर जब चारों तरफ़ नजरें, तू अपनों को ढूंढेगा, तब यह खुद की बनाई दीवार, तुझे रोकेगा। ​इसलिए दिलों के बीच कभी न ऐसी दीवार तान, अपनों के बिना अधूरा है, इस जीवन का हर अरमान।

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