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21.3.2026 बहुत से लोग दूसरों के दोष देखते हैं। उनकी गलतियां निकालते हैं। *"जिन लोगों में कम बुद्धि होती है, वे इतने सक्षम नहीं होते, कि दूसरे की गलती निकाल सकें। फिर भी वे दूसरों की गलतियां निकालते हैं, और उन पर झूठे आरोप लगाते हैं।"* *"और जो कुछ बुद्धिमान लोग होते हैं, वे भी दूसरों की गलतियां बहुत निकालते हैं, परंतु अपनी गलती नहीं देखते। यह न्याय नहीं है। यह उचित व्यवहार नहीं है।"* *"जो लोग दूसरों की गलतियां निकालते हैं, उन्हें अपनी गलतियां भी देखनी चाहिएं। पहले अपनी गलतियां दूर करनी चाहिएं। उसके बाद फिर दूसरों की गलती देखना और उन्हें बताना चाहिए।" "परंतु इस काम के लिए बहुत सूक्ष्म बुद्धि की आवश्यकता होती है। ईमानदारी की आवश्यकता होती है। और पक्षपात रहितता, मन की शुद्धि एवं शास्त्रों के अध्ययन की आवश्यकता होती है। तब आप अपनी और दूसरों की गलतियां ठीक-ठीक पकड़ सकते हैं, अन्यथा नहीं।" "इसी प्रकार से जब कोई दूसरा व्यक्ति उनकी गलती बताता है, उसे वे स्वीकार नहीं करते। यह भी उचित व्यवहार नहीं है।"* जब आप दूसरे की गलती बताते हैं तो अपनी गलती सुनने की भी हिम्मत होनी चाहिए, और इतनी ईमानदारी होनी चाहिए, कि *"यदि आपकी गलती प्रमाणों से सिद्ध हो रही है, तो उसे ईमानदारी से स्वीकार भी करें। इस प्रकार का व्यवहार करना उचित होता है।"* आप सब लोग भी अपना अपना आत्म निरीक्षण करें और देखें कि *"आपमें कितनी ईमानदारी और हिम्मत है, अपनी गलती को स्वीकार करने की। जो व्यक्ति ईमानदारी और हिम्मत से अपनी गलती स्वीकार करता है, फिर उसे दूर करने के लिए पूरा पुरुषार्थ भी करता है, तब जाकर उसकी गलतियां दूर हो सकती हैं। तभी उन गलतियों से होने वाली हानियों से बचा जा सकता है, और दुखों से छूट कर अपने जीवन को आनन्दमय बनाया जा सकता है, अन्यथा नहीं।"* ---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात."*

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