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6.5.2026 आज का व्यक्ति भागे जा रहा है। जिसको देखो वही भाग रहा है। *"सुबह 4 बजे से लेकर देर रात तक सड़कों पर इतना अधिक ट्रैफिक होता है। रेलगाड़ियां 24 घंटे चलती हैं। हजारों विमान हर रोज उड़ते हैं। जिसको देखो वही भागा जा रहा है।"* यह सारी भाग दौड़ केवल धन सम्मान कमाने और भौतिक भोग प्राप्त करने के लिए है। *"परंतु वास्तव में भाग दौड़ जिस लक्ष्य के लिए होनी चाहिए, उस लक्ष्य का पता बहुत कम लोगों को है। उस दिशा का पता बहुत कम लोगों को है।"* *"आप बहुत तेज भले ही न भागें, भले ही धीरे चलें, छोटे कदम रखें। परंतु इतना निश्चित अवश्य कर लें, कि सही दिशा कौन सी है, और सही लक्ष्य क्या है?"* वेदों के अनुसार सही लक्ष्य है, *"सारे दुखों से छुटकारा पाना, और ईश्वर का उत्तम आनंद प्राप्त करना।"* यद्यपि यह सब का लक्ष्य है। परंतु लोग अपने इस लक्ष्य को जानते नहीं। इसलिए भोगों को भोगने की ओर दौड़ लगा रहे हैं। *"यह तो उनका परिश्रम व्यर्थ सा ही है।"* भोगों को भोगकर यदि कोई व्यक्ति यह परिणाम निकल ले, कि *"इनमें पूर्ण तृप्ति शांति नहीं है। इसलिए भोगों की ओर अंधाधुंध दौड़ना बुद्धिमत्ता नहीं है। और वह वापस ईश्वर की ओर चल पड़े। अध्यात्म मार्ग पर चल पड़े, तो उसका यह परीक्षण करना सार्थक है, कि भोगों में शाश्वत सुख नहीं है।"* इसलिए आप भी अपने लक्ष्य को निर्धारित करें। अपनी दिशा को निर्धारित करें। *"संसार के भोगों का परीक्षण अवश्य करें, और परिणाम निकाल कर वापस अपने लक्ष्य की ओर लौटें।" "अंधाधुंध सांसारिक भोगों को भोगना कोई बुद्धिमत्ता की बात नहीं है। क्योंकि इसमें वह परिणाम नहीं मिलता, जो आप चाहते हैं। अर्थात 100% दुख निवृत्ति और ईश्वर के उत्तम आनन्द की प्राप्ति भोगों में नहीं होती।"* ---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात."*

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