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SHREE SHARMA

86 days ago

भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का संयुक्त स्मरण जीवन में धर्म, अर्थ, सुख और सौभाग्य प्रदान करने वाला माना गया है। जहां भगवान विष्णु सृष्टि के पालनकर्ता हैं, वहीं माता लक्ष्मी उनकी दिव्य शक्ति के रूप में भक्तों को धन, वैभव और मंगल प्रदान करती हैं। शास्त्रों में कहा गया है कि जहां विष्णु का निवास होता है, वहां लक्ष्मी स्वयं विराजमान रहती हैं। श्री विष्णु-लक्ष्मी स्तोत्र शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशम्। विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम्॥ लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यम्। वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्॥ नमस्तेऽस्तु महामाये श्रीपीठे सुरपूजिते। शङ्खचक्रगदाहस्ते महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥ सर्वज्ञे सर्ववरदे सर्वदुष्टभयङ्करि। सर्वदुःखहरे देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥ सिद्धिबुद्धिप्रदे देवि भुक्तिमुक्तिप्रदायिनि। मन्त्ररूपे सदा देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥ आद्यन्तरहिते देवि आद्यशक्ति महेश्वरि। योगजे योगसम्भूते महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥ इस स्तोत्र का श्रद्धापूर्वक पाठ करने से भगवान विष्णु की कृपा तथा माता लक्ष्मी का स्थायी आशीर्वाद प्राप्त होता है। विशेष रूप से गुरुवार, शुक्रवार तथा एकादशी के दिन इसका पाठ अत्यंत शुभ माना गया है। मान्यता है कि जो भक्त विष्णु-लक्ष्मी का संयुक्त पूजन करता है, उसके जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है। ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ ॥ ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः ॥

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Comments (4)

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Jun 8, 2026

🙏‼️ Om Shree Lakshmi Narayan Namo Namah ‼️🙏

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Jun 8, 2026

🙏‼️ Namastey Garudarudhe Kolasur Bhaynkari, Sarvapaap Hare Devi Mahalakshmi Namastute ‼️🙏

R k jangid 

phulera Jaipur

R k jangid phulera Jaipur

Jun 4, 2026

जय श्री लक्ष्मी नारायण जी की शुभ रात्रि 🌹🙏