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ॐ नारायण जगन्नाथाय नमः ॐ विश्वमूर्तये जगन्नाथाय नमः ॐ देवादिदेव जगन्नाथाय नमः ॐ अनंताय जगन्नाथाय नमः भगवान जगन्नाथ की स्तुति में आदि शंकराचार्य द्वारा रचित 'जगन्नाथ अष्टकम' अत्यंत भावपूर्ण और प्रभावशाली है। मान्यता है कि इसका पाठ करने से मनुष्य के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे मुक्ति की प्राप्ति होती है। यहाँ जगन्नाथ अष्टकम के मुख्य अंश और उनका हिंदी भावार्थ दिया गया है: जगन्नाथ अष्टकम (प्रमुख अंश) 1. कदाचित् कालिन्दी-तट-विपिन-संगीतरवको मुदाभीरी-नारी-वदन-कमलास्वाद-मधुपः। रमा-शम्भु-ब्रह्मामरपति-गणेशार्चित-पदो जगन्नाथः स्वामी नयन-पथ-गामी भवतु मे ॥ * अर्थ: जो कभी यमुना के तट पर वनों में मधुर मुरली बजाते हैं, जो गोपियों के मुख-कमल का रस पान करने वाले भौंरे के समान हैं और जिनके चरणों की पूजा लक्ष्मी, शिव, ब्रह्मा और इंद्र करते हैं—वे ब्रह्मांड के स्वामी जगन्नाथ मेरी आँखों के सामने प्रकट हों। 2. भुजे सव्ये वेणुं शिरसि शिखिपिच्छं कटितटे दुकूलं नेत्रान्ते सहचर-कटाक्षं विदधते। सदा श्रीमद्वृन्दावन-वसति-लीला-परिचयो जगन्नाथः स्वामी नयन-पथ-गामी भवतु मे ॥ * अर्थ: जिनके बाएं हाथ में बांसुरी, सिर पर मोर पंख और कमर पर रेशमी पीतांबर सुशोभित है, जो अपने मित्रों पर तिरछी नजरों से कृपा दृष्टि डालते हैं और जो सदैव वृंदावन की लीलाओं में मग्न रहते हैं—वे जगन्नाथ स्वामी मेरे मार्गदर्शक बनें। 3. महाम्भोधेस्तीरे कनक-रुचिरे नील-शिखरे वसन् प्रासादान्तः सहज-बलभद्रेण बलिना। सुभद्रा-मध्यस्थः सकल-सुर-सेवावसरदो जगन्नाथः स्वामी नयन-पथ-गामी भवतु मे ॥ * अर्थ: जो विशाल समुद्र के तट पर, सुनहरी आभा वाले नील पर्वत (पुरी) के मंदिर के भीतर अपने बलशाली भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के बीच विराजमान हैं और सभी देवताओं को अपनी सेवा का अवसर देते हैं—वे जगन्नाथ स्वामी मेरी आंखों के सामने हों। अष्टकम का महत्व इस स्तोत्र के अंत में कहा गया है कि जो व्यक्ति शुद्ध मन से इन आठ पदों का पाठ करता है, वह समस्त पापों से मुक्त होकर विष्णु लोक (वैकुंठ) को प्राप्त करता है। फलश्रुति: > "जगन्नाथाष्टकं पुण्यं यः पठेत् प्रयतः शुचिः ।" > (जो पवित्र होकर इस अष्टकम का पाठ करता है, वह पुण्य का भागी बनता है।) >

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Comments (2)

Lal  Singh 🇮🇳🇮🇳

Lal Singh 🇮🇳🇮🇳

Feb 19, 2026

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः 🙏। जय जगरनाथ जी

RAKESH SHARMA OM NAMH SHIVAY 🥀🚩

RAKESH SHARMA OM NAMH SHIVAY 🥀🚩

Feb 19, 2026

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय अति सुंदर अपार सराहनीय बेहद प्रशंसनीय प्रस्तुती 🙏🙏👌👌👍💐💐🌺🌺🚩🚩🥀