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ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः 🚩सुप्रभात भीतर क्षमा हो तो क्षमा निकलेगी भीतर क्रोध हो तो क्रोध निकलेगा इसलिए जब भी कुछ आपके भीतर से बाहर निकले तो दूसरे को दोषी मत ठहराना वह आपकी ही संपदा है जिसको आप अपने भीतर छिपाए थे .. अपने अंदर के बच्चे को हंमेशा ज़िंदा रखिये हद से ज्यादा समझदारी जीवन को नीरस कर देती है.... _संयम क्या है......एक युद्ध.....अपने ही विरूद्ध.... बटुए को कहाँ मालूम पैसे उधार के हैं वो तो बस फूला ही रहता है अपने गुमान में ठीक यह ही हाल हमारा है साँसे उस प्रभु की उधार दी हुई है पर ना जाने गुमान किस बात पर है.... 🌷🌞॥जय श्री हरि शरणम् ॥🌞🌷

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