MyMandirInstall

2.1.2026 ईश्वर ने सबको प्रतिदिन 24 घंटे का समय दिया है। और इसी तरह से एक-एक दिन मास और वर्ष करके बहुत लंबे वर्षों 60/70/80 वर्षों का जीवन दिया है। *"अब यह हर व्यक्ति की अपनी इच्छा है, कि वह अपने समय का उपयोग कैसे करता है?"* *"कुछ लोग आलसी होते हैं। वे अपने समय को इधर-उधर के व्यर्थ कामों में नष्ट कर देते हैं। और अपने आलस्य आदि दोषों के कारण घंटों तक सोते ही रहते हैं।"* *"कुछ लोग पुरुषार्थी होते हैं। अथवा परिस्थितियां उन्हें मेहनत करने पर मजबूर कर देती हैं। वे अपने पुरुषार्थ के पूर्व संस्कारों के कारण अथवा परिस्थितियों के कारण समय का पूरा उपयोग करते हैं, और बहुत अच्छी उन्नति करते हैं। उनका समय सोना बन जाता है। अर्थात स्वर्ण धातु के समान मूल्यवान बन जाता है।"* कहने का सार यह है, कि *"आपके जीवन का सारा समय तो आपका ही है। आप अपने समय को सोने = शयन में भी बिता सकते हैं, और अपने समय को सोना = स्वर्ण धातु के समान मूल्यवान भी बना सकते हैं।" "अब यह आपकी इच्छा और बुद्धिमत्ता पर निर्भर करता है कि आप अपने समय को सोने में गंवा देते हैं, अथवा उसे सोना = स्वर्ण बना लेते हैं।"* ---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात."*

Post media

Comments (0)

No comments yet. Be the first to comment!