
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
5 days ago
कौन हैं जो शेर पर सवार है? माँ दुर्गा का वह चित्र जो हम बचपन से देखते आए हैं, वह चित्र नहीं, कुंडलिनी का नक्शा है। बीच में शेर पर सवार माँ, एक ओर भैरव, दूसरी ओर हनुमान जी। आज लोग इसे बस एक पुरानी डिजाइन समझते हैं, पर हमारे ऋषियों ने इसमें पूरे शरीर का विज्ञान छिपा दिया था। हमारा शरीर ही यंत्र है और मंत्र उसकी चाबी। हमारी रीढ़ में तीन नाड़ियां बहती हैं - इड़ा, पिंगला और सुषुम्ना। बाईं ओर इड़ा, चंद्र नाड़ी, नीली धमनियों जैसी शीतल। दाईं ओर पिंगला, सूर्य नाड़ी, लाल सिराओं जैसी उष्ण। और बीच में सुषुम्ना, खाली आकाश जैसी, जहाँ चेतना सोई है। माँ दुर्गा बीच में उसी सुषुम्ना स्वरूपा चेतना हैं। एक ओर भैरव इड़ा के रक्षक हैं - वे हमारे भय, तमस और मृत्यु-भय को काटते हैं। दूसरी ओर हनुमान जी पिंगला के प्रतीक हैं - वे प्राण, बल और निष्ठा देते हैं। और शेर? शेर हमारा मन है। जब तक मन जंगली है, वह हमें खाता है। जब उस पर शक्ति सवार हो जाती है, वही मन धर्म का वाहन बन जाता है। अब समझिए कुंडलिनी जागरण को। मूलाधार में सोई हुई कुंडलिनी शक्ति सर्पिणी जैसी है। मंत्र-जप से जब इड़ा-पिंगला संतुलित होती हैं, तो सुषुम्ना का द्वार खुलता है और शक्ति ऊपर उठने लगती है। हर चक्र को भेदती हुई वह सहस्रार में शिव से मिलती है। माँ की मूर्ति में दिखाया गया तेज, उनका लाल वर्ण, उनके अस्त्र - यह सब उसी उठती हुई शक्ति का चित्रण है। और इसीलिए हम देवी को लाल पुष्प चढ़ाते हैं। लाल रंग केवल सजावट नहीं है। लाल रक्त का रंग है, रजोगुण का रंग है, मूलाधार का रंग है। लाल पुष्प हमारी प्राण-शक्ति, हमारी सक्रिय ऊर्जा का प्रतीक है। हम माँ को कहते हैं - हे शक्ति, यह मेरा रजस, मेरा रक्त, मेरा परिश्रम, सब आपको अर्पित है। आप इसे शुद्ध करके चेतना बना दीजिए। गुड़हल का फूल खास इसलिए है क्योंकि वह बिना खुशबू के भी केवल रंग और समर्पण से खिलता है - जैसे सच्ची भक्ति दिखावे से नहीं, समर्पण से होती है। पर आज क्या हो रहा है? देवी का कुछ भी रूप बना दिया जाता है। कभी सिनेमाई, कभी फैशनेबल। जिस मूर्ति में कुंडलिनी का नक्शा था, उसे हम डेकोरेशन बना रहे हैं। जब रूप का अर्थ ही मिट जाएगा, तो पूजा साधना कैसे रहेगी? फिर वह मेला ही तो रह जाएगी - फोटो, सेल्फी और मनोरंजन। याद रखिए, मूर्ति बनाना कला नहीं, साधना है। हर रंग, हर आयुध, हर साथी देवता का स्थान निश्चित है। इसे बिगाड़ना देवी का अपमान नहीं, अपनी ही चेतना के नक्शे को मिटाना है। बाहर की माँ को देखिए, फिर आंख बंद करके अंदर की माँ को देखिए। वही दुर्गा आपके अंदर शेर पर सवार होने की प्रतीक्षा कर रही हैं। कमेंट में लिखिए 👇 जय मां दुर्गा 🌺🌺🌺🌺🌺

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