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6.1.2026 प्रत्येक व्यक्ति अपना जीवन सुख से जीना चाहता है। *"परंतु अधिकांश लोगों को यह मालूम नहीं है, कि उनका जीवन सुखमय कैसे बनेगा?"* सीधी सरल सी बात है। *"यदि आप छोटी-छोटी बातों में उदास या निराश हो जाएंगे, तो आपका जीवन दुखमय हो जाएगा। और यदि आप उन छोटी-छोटी बातों की परवाह नहीं करेंगे, उनको भी सकारात्मक ढंग से देखेंगे, तो आपका जीवन मुस्कुराहट से भरा होगा, और आप सुख पूर्वक जीवन जिएंगे।"* उदाहरण के लिए -- किसी ने आपका अपमान कर दिया। तो उसे ऊपर से तो ऐसा कहें, ----- *"आपने यह व्यवहार ठीक नहीं किया। भविष्य में कृपया ध्यान रखेंगे। सबको न्याय पूर्वक व्यवहार करना चाहिए। यदि कोई दूसरा व्यक्ति आपका अपमान करेगा, तब आपको भी अच्छा नहीं लगेगा।"* इस प्रकार से उसे ऊपर-ऊपर से तो ऐसा कहें। परंतु अपने मन में ऐसा सोचें, कि *"यह व्यक्ति असभ्य है। इसमें कुछ दुष्टता भी है। ऐसे दुष्टों की क्या चिंता करनी।" "खाओ पियो, भगवान का भजन करो, और अपने मस्त रहो।"* *"इस प्रकार से उसकी बात को हवा में उड़ा दीजिए, और अपने मन में प्रसन्न रहिए। इस प्रकार से आप सुखी जीवन जी सकते हैं।"* ---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात."*

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