
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
4 hours ago
23.9.2026 यह सामान्य नियम है, कि *"सबको बुद्धिमत्ता से काम करना चाहिए। परंतु फिर भी कभी-कभी ऐसा देखा जाता है, कि कुछ कम बुद्धि वाले लोग कभी कभी कुछ गलतियां कर बैठते हैं, और मुसीबत में फंस जाते हैं। अथवा कुछ पढ़े लिखे लोग भी अपना शौक पूरा करने के लिए वर्षा ऋतु में नदी के बीचों-बीच या कुछ अन्दर जा कर किसी छोटे से टापू पर खड़े होकर वहां अपनी फोटो रील आदि बनाते रहते हैं।"* इस प्रकार की वे गलतियां कर देते हैं। *"यदि अचानक पीछे नदी में पानी बढ़ जाए, तो वे रील बनाने वाले लोग उस पानी की तेज धार में फंस जाते हैं।"* *"अब ऐसी स्थिति में कुछ लोग उन पर टीका टिप्पणी करते हैं। उनका मजाक उड़ाते हैं, कि देखो कितने मूर्ख लोग हैं, वहां नदी में जाकर रील बना रहे हैं। इनको इतना होश नहीं है, कि नदी में यदि पानी बढ़ गया, तो वे मुसीबत में फंस जाएंगे।"* यद्यपि यह बात ठीक है, कि उन्होंने गलती तो की है। *"परंतु अब वे मुसीबत में फंस चुके हैं। अब उन पर ज्यादा तर्क वितर्क टीका टिप्पणी करने की बजाय, उनकी जान बचाने का प्रयास किया जाना चाहिए।"* *"इसलिए ऐसी परिस्थितियों में, मुसीबत में फंसे हुए उन लोगों पर कृपया टीका टिप्पणी न करें, बल्कि उनके बचाव का उपाय करें। यही अधिक अच्छा है।"* कभी-कभी ऐसा भी देखा जाता है, कि मुंबई जैसे नगर में बाढ़ आ गई। और स्कूटर वाले कार वाले ,नागरिक लोग बाढ़ के पानी में फंसे हुए हैं। और वहां प्रेस वाले अपने अपने कैमरे लेकर आ जाते हैं, और पूछते हैं, *"अब आपको कैसा लग रहा है?"* तो ऐसा पूछना भी अच्छा नहीं है। *"वहां बाढ़ की स्थिति में फंसे हुए उन स्कूटर कार वाले लोगों का इंटरव्यू लेना उनका मजाक उड़ाने जैसा है। और किसी मुसीबत में फंसे हुए व्यक्ति का मजाक उड़ाना भी ठीक नहीं है। इसलिए वहां उनका इंटरव्यू लेने की बजाय, उन्हें बाढ़ के पानी से बचाकर बाहर लाना चाहिए। उनकी सहायता करनी चाहिए। इसी में बुद्धिमत्ता है।"* ---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात."*

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