MyMandirInstall

#श्री_अन्नकूट_महोत्सव_व_गोवर्धन_पूजा की शुभकामनाएं बधाई 🕉️🚩कैसे हुई थी गोवर्धन पूजा की शुरुआत? जानें मान्यता सबसे पहले आपको गोवर्धन पूजा करने की वजह के बारे में बता देते हैं. मान्यता है कि युग में भगवान श्री कृष्ण के कहने पर बृजवासियों ने भगवान इन्द्र की जगह पर गोवर्धन पर्वत की पूजा की थी। क्योंकि गायों को चारा गोवर्धन पर्वत से मिलता था और गायें बृजवासियों के जीवन-यापन का जरिया थीं 🕉️🚩क्या होता है अन्नकूट? गोवर्धन पूजा में क्या है इसका महत्व अन्नकूट कई तरह के अन्न और सब्जियों के समूह को कहा जाता है। इस दिन अपनी सामर्थ्य के अनुसार 21, 51, 101 और 108 सब्ज़ियों को मिलाकर एक तरह की मिक्स सब्ज़ी बनाई जाती है जिसको विशेष तौर पर गोवर्धन पूजा के दिन भगवान को भोग लगाने के लिए बनाया जाता है। इसके साथ ही तरह-तरह के अन्न से तैयार पकवान और मिठाइयों से भी भगवान श्रीकृष्ण को भोग लगाने की परम्परा है। 🕉️🚩गोवर्धन पूजा से जुड़ी खास बातें- गोवर्धन पूजा दिवाली के अगले दिन की जाती है। इस दिन मथुरा में गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा भी की जाती है। घरों में गोबर से गोवर्धन पर्वत बना कर उसका पूजन करने की भी परंपरा है। गोवर्धन पर अन्न और नई फसल का भी पूजन किया जाता है. 🕉️🚩क्यों की जाती है गोवर्धन पूजा? जानें महत्व पौराणिक मान्यता के मुताबिक, भगवान कृष्ण ने ब्रजवासियों से भगवान इन्द्र की पूजा के स्थान पर गोवर्धन पर्वत की पूजा करने के लिए कहा, क्योंकि इसी पर्वत पर सभी ब्रजवासियों की गायें चरने जाती थीं। इसी पर्वत से उन्हें अन्न की प्राप्ति होती थी। जब ब्रजवासियों ने गोवर्धन की पूजा करनी शुरू की, तो भगवान इंद्र क्रोधित हो गये और पूरे ब्रज में कई दिन तक लगातार मूसलाधार बारिश होने लगी। तब भगवान कृष्ण ने अपनी एक अंगुली पर गोवर्धन पर्वत को उठा लिया, जिसके नीचे सारे ब्रजवासियों ने शरण ली 🚩✊जय हिंदुत्व✊🚩 ☀!! श्री हरि: शरणम् !! ☀ 🍃🎋🍃🎋🕉️🎋🍃🎋🍃 🙏🏾🙏🏾🙏🏾🙏🏾🙏🏾🙏🏾🙏🏾🙏🏾🙏🏾

Post media

Comments (4)

Lal  Singh 🇮🇳🇮🇳

Lal Singh 🇮🇳🇮🇳

Oct 23, 2025

jai shree krishna ji 🙏

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Oct 22, 2025

गोवर्धन पूजा दिवाली के अगले दिन मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण हिंदू त्योहार है। इसे अन्नकूट के नाम से भी जाना जाता है। मुख्य बातें: दिनांक: यह कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाया जाता है। (इस वर्ष, 2025 में, अधिकांश स्थानों पर यह 22 अक्टूबर को मनाया जाएगा)। महत्व: इस पर्व की शुरुआत भगवान श्रीकृष्ण ने की थी, जब उन्होंने ब्रजवासियों को मूसलधार वर्षा से बचाने के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उंगली पर उठाया था। यह इंद्र के अहंकार को चूर करने और प्रकृति की पूजा के महत्व को दर्शाने के लिए किया गया था। यह त्योहार प्रकृति के साथ मानव के सीधे संबंध को दिखाता है। इस दिन गोधन यानी गायों की पूजा की जाती है, क्योंकि गायों को देवी लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है और वे सुख-समृद्धि तथा स्वास्थ्य प्रदान करती हैं। पूजा विधि: लोग अपने घर के आंगन या मुख्य द्वार पर गोबर से गोवर्धन भगवान की प्रतिमा/आकृति बनाते हैं। शाम को गोवर्धन भगवान की पूजा की जाती है, जिसमें चावल, रोली, खीर, दूध, बताशे आदि अर्पित किए जाते हैं। भगवान को छप्पन भोग (56 प्रकार के व्यंजन) भी अर्पित किए जाते हैं, जिसे अन्नकूट कहा जाता है। गोवर्धन पर्वत की सात बार परिक्रमा की जाती है (या घर में बनाए गए गोवर्धन की)। गाय, बैल और कृषि में काम आने वाले पशुओं की भी पूजा की जाती है।

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Oct 22, 2025

🙏‼️ Jai Shree Krishna 🙏 Goverdhan Puja or Shree Krishna Ji ke Pass 56 Bhog ki Hardik Shubhkamnaye 🙏🌹🌹