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SHREE SHARMA

271 days ago

पाँचमहाभूत - ● पृथ्वी के पांच गुण~ अस्थि मांस त्वक नाड़ी रोमाणि इति पंच गुणा भूमिः शरीर मे पृथ्वी के निम्नलिखित पांच गुणों के रूप में रहती है। हड्डी, मांस , त्वचा अर्थात चर्म शिरा और धामनी रूप नाडिया और रोएं ● जल के पांच गुण~ लाला मूत्रम सुक्रम शोणितम् स्वेदः इति गुणः आपः शरीर मे जल निम्नलिखित पांच गुणों रहती है। लार , मूत्र, वीर्य, रक्त, और पशीना ● तेजस तत्व के पांच गुण~ क्षुधा तृष्णा निद्रा कान्तिः आलस्यम इति पंच गुणं तेजः । शरीर मे तेज अर्थात अग्नि तत्व निम्नलिखत पांच गुणों के रूप में विद्यामान रहता है। भूख, प्यास, निद्रा, कांति, अर्थात शोभा और आलस्य ● वायु तत्व के पांच गुण~ धावनम भरमणं प्रसारणं आकुंचनं निरोधम इति पंच गुणो वायु। शरीर मे वायु इन पांच गुणों के रूप में रहता है। दौड़ना, भृमण, तैरना, फैलाना, अर्थात सिकोड़ना और रोकना अर्थात ढकलेना। ● आकाश तत्व के गुण~ रागः द्वेषः भयंम लज्जा मोहः इति पंच गुण आकाशः इति पंच विशन्ति गुणानां भूतानां प्रकृति पिंडः शरीर मे आकाश के निम्नलिखित पांच गुणों के रूप में विद्यामान रहता है। अतिशय, प्रेमवश लगाव सत्रुता, भय, और मोह इति पंच विशन्ति गुणानां भूताना प्रकृति पिंड इस प्रकार पृथ्वी आदि पाँच भुत पांच पांच गुणों से युक्त भूतों का प्रकृति पिंड है। ● अंतःकरण के पाँच गुण~ मनः बुद्धिः अहंकारः चित्तम चैतन्यम इति अंतःकरण पंचकम् । अंतःकरण के पांच गुण मन, बुद्धि, अहंकार, चित्त, चैतन्य ● प्रथम अंतःकरण मन के पांच गुण~ संकल्पः विकल्पः मूर्छा जड़ता मननम इति पंच गुणम मनः । प्रथम अंतःकरण मन के पाँच गुण है। संकल्प करना अर्थात कुछ करने का निश्चय करना विकल्प अर्थात किस विषय मे दो य अधिक पक्ष विपक्ष के मध्य विचार करना मूर्छा अर्थात अल्प काल के लिए अचेतनता जड़ता अर्थात विवेक का अभाव और मनन अर्थात किसी निर्णय पर पहुचने के लिए तर्क वितर्क की सहायता से विचार करना ● बुद्धि के पाँच गुण~ विवेकः वैराग्यम शान्तिः संतोषः क्षमा इति पंच गुण बुद्धिः । बुद्धि के पांच गुण यथार्थ , ज्ञान , राग का अभाव शांति, संतोष और सहनशीलता ● अहंकार के पाँच गुण~ अभिमानम् मदियम ममसुखम ममदुःखम इति पंच गुणो अहंकारः । अहंकारः के पांच गुण दर्प अर्थात में इन से श्रेष्ट हु यह भावना यह मेरा है। यह भाव मेरा सुख मेरा दुख और यह मेरा है यह भाव ● चित्त के पांच गुण~ मतिः घृतिः स्मृतिः त्यागः स्वीकारः इति पंच गुणं चित्तम । इच्छा धैर्य स्मरण होना छोड़ने की भावना और अपना मान लेने की भावना ये पांच गुण चित्त के होते है।

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Comments (9)

SHREE SHARMA

SHREE SHARMA

Dec 3, 2025

प्रणाम दीदी

Gori

Gori

Dec 2, 2025

🙏 जय श्री कृष्ण 🌹

Riya Riya  💖💖

Riya Riya 💖💖

Dec 2, 2025

Jai shree krishna 🙏🌹 radhe radhe ji 🌹🙏 Suprabhat Vandan Bhaiya Ji 🙏🙏

Rohit vaishnav

Rohit vaishnav

Dec 2, 2025

ekdam sahi hai Jai shree Krishna 🙏🙏🙏🙏🙏🙏

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Dec 2, 2025

Bahut hi Sundar Gyan Pradayak Prasanga 👌👌❤️ Radhey Radhey ❤️ Jai Shree Krishna 🙏 Suprabhat