
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
204 days ago
7.2.2026 सामान्य रूप से तो सभी लोग ठीक व्यवहार करते हैं। *"परंतु जब कोई विशेष घटना घटती है, और व्यक्ति को क्रोध आता है, उस समय भी यदि वह अपने मन वाणी और शरीर पर संयम रखे। अपशब्दों का प्रयोग न करे, अर्थात गालियां न दे, संयमित भाषा बोले, शरीर से मारपीट न करे, मन का संतुलन बनाए रखे, शान्त रहे, तब तो वह व्यक्ति सुखी है, और उसका जीवन सफल है। वही बुद्धिमान है।"* *"यदि क्रोध की घटना उपस्थित होने पर व्यक्ति बौखला जाता है, असंतुलित हो जाता है, गालियां देता है, अनावश्यक मारपीट करता है, तो यह समझना चाहिए कि वह व्यक्ति दुखी है। और उसका जीवन निष्फल है। ऐसा व्यक्ति बुद्धिमान नहीं कहलाता, बल्कि .... कहलाता है।"* *"बौखला जाना असंतुलित हो जाना गालियां देना व्यर्थ मारपीट करना इत्यादि परिणाम कोई घटना विशेष होने पर ही होता है। और तभी उस व्यक्ति की परीक्षा होती है, कि वह कितना संयमी और सदाचारी है?"* *"यदि कोई व्यक्ति सामान्य स्थिति में भी, बिना विशेष घटना के यूं ही गुस्सा करे, व्यर्थ की बकबक करे, तब तो वह व्यक्ति सामान्य रूप से स्वस्थ भी नहीं है।" "तब तो लोग उसे 'पागल' कहते हैं, और यदि उसकी क्रियाएं समाज के लिए दुखदायक हो जावें, तो लोग उसे 'पागलखाने' तक भी पहुंचा देते हैं।"* आप भी ऊपर लिखी बातों से अपना आत्मनिरीक्षण करें, और विचार करें, कि *"आप सुखी और बुद्धिमान हैं, अथवा दुखी और .... हैं?आपका जीवन सफल है, या निष्फल है?"* *"यदि आप भी ऐसी घटनाओं में असंतुलित हो जाते हैं, तो ऊपर बताई बातों का लाभ लेवें। अपने मन बुद्धि को संतुलित रखें। बुद्धिमत्ता से काम लेवें। सुखी बनें और अपने जीवन को सफल बनाएं।"* ---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात."*

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