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जय सिया राम जी 🙏 *शुभ दोपहर जी 🙏 *अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव** भारत के अन्य हिस्सों में दशहरा समाप्त होने के दिन यानी विजय दशमी से शुरू होता है। ढालपुर मैदान में आयोजित होने वाला यह सात दिवसीय भव्य उत्सव अपनी अनूठी देव परंपराओं के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। ### पहले दिन से अंतिम दिन तक के मुख्य कार्यक्रम: * **पहला दिन (विशाल रथ यात्रा और शुभारंभ):** * कुल्लू दशहरा की शुरुआत विजयादशमी के दिन ऐतिहासिक रथ यात्रा से होती है। * भगवान रघुनाथ जी की भव्य पालकी को उनके मुख्य मंदिर से भव्य रथ पर आसीन किया जाता है। * ढालपुर मैदान में हजारों श्रद्धालुओं द्वारा भगवान रघुनाथ के रथ को खींचा जाता है। इसी दिन कुल्लू घाटी और आसपास के क्षेत्रों से सैकड़ों देवी-देवता अपने पारंपरिक रथों और वाद्ययंत्रों (ढोल-नगाड़ों) के साथ ढालपुर पहुंचते हैं। * **दूसरा से छठा दिन (देव मिलन, मेले की रौनक और सांस्कृतिक संध्याएं):** * **देव महाकुंभ:** इन दिनों में ढालपुर मैदान ‘देवलोक’ बन जाता है। यहाँ सैकड़ों देवी-देवता आपस में मिलते हैं और स्थानीय लोग अपने आराध्य देवी-देवताओं के दर्शन कर आशीर्वाद लेते हैं। * **स्थानीय व अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला:** मैदान में विशाल बाजार सजता है जहाँ हिमाचली हस्तशिल्प, शॉल, पश्मीना, सूखे मेवे और स्थानीय उत्पाद बिकते हैं। * **सांस्कृतिक संध्याएं:** हर शाम भव्य सांस्कृतिक मंच पर हिमाचल के साथ-साथ देश-विदेश के कलाकार, लोक गायक, और प्रसिद्ध स्टार कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देते हैं, जिन्हें देखने हज़ारों की भीड़ जुटती है। * **सातवां और अंतिम दिन (लंका दहन और रथ वापसी):** * उत्सव के आखिरी दिन ब्यास नदी के तट (लंका बेहर) पर प्रतीकात्मक रूप से **'लंका दहन'** किया जाता है। * इसके बाद भगवान रघुनाथ जी के रथ को दोबारा मुख्य स्थल से ब्यास नदी के किनारे ले जाया जाता है, जहाँ धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होते हैं। * अनुष्ठान पूरा होने के बाद भगवान रघुनाथ जी की पालकी को उनके मूल मंदिर वापस ले जाया जाता है और इसके साथ ही सात दिनों तक चलने वाला यह अंतरराष्ट्रीय उत्सव संपन्न होता है

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