
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
29 days ago
*हर हर महादेव 🔱* शुभ दोपहर जी 📿 श्रावण का महीना है, तो शिवभक्ति का रंग और भी गहरा हो जाता है 💙 *भगवान शिव को "नीलकंठ" क्यों कहा जाता है?* ये कथा *समुद्र मंथन* की है जी... 1. *समुद्र मंथन शुरू हुआ* देवताओं और दानवों ने मिलकर अमृत पाने के लिए क्षीरसागर का मंथन किया। मंदराचल पर्वत को मथनी और वासुकी नाग को रस्सी बनाया। 2. *पहले विष निकला* मंथन से सबसे पहले एक भयंकर विष निकला जिसका नाम था *"कालकूट विष"*। ये इतना जहरीला था कि इसकी लपटों से पूरी सृष्टि जलने लगी। धरती, आकाश, पाताल... तीनों लोक संकट में आ गए। 3. *देव-दानव घबराए* सब ब्रह्मा जी और विष्णु जी के पास गए। उन्होंने कहा - "इस विष को सिर्फ महादेव ही पी सकते हैं, और कोई नहीं।" 4. *भोलेनाथ ने जगत की रक्षा की* भगवान शिव ने बिना एक पल सोचे वो पूरा कालकूट विष अपने हाथ में लेकर पी लिया। क्योंकि वो जानते थे अगर ये विष धरती पर गिर गया तो सब खत्म हो जाएगा। 5. *पार्वती जी ने कंठ रोका* जब विष शिव जी के गले तक पहुंचा तो माता पार्वती ने तुरंत उनका कंठ दबा दिया। ताकि विष पेट में न जाए और गले में ही रुक जाए। इसी वजह से भगवान शिव का गला नीला पड़ गया। *नीला + कंठ = नीलकंठ* 💙 *इस कथा का रहस्य क्या है?* नीलकंठ बनकर शिव जी ने हमें सिखाया - *"दूसरों की भलाई के लिए जहर भी पीना पड़े तो पी लो, पर सृष्टि को बचाओ।"* त्याग और करुणा की सबसे बड़ी मिसाल हैं वो। इसीलिए श्रावण में हम शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र चढ़ाकर "ॐ नमः शिवाय" जपते हैं। ताकि नीलकंठ हम पर भी कृपा बनाए रखें। *बोलो नीलकंठ महादेव की जय!* 🙏
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