
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
162 days ago
🛕꧁ जय द्वारकाधीश꧂🛕 फूलडोल बाबा वृन्दावन के एक विरक्त संत थे। उनका कोई घर नहीं था, कोई संपत्ति नहीं थी। वे केवल यमुना किनारे या किसी वृक्ष के नीचे बैठकर निरंतर 'राधे-राधे' रटते रहते थे। उनकी भक्ति ऐसी थी कि वे बाहरी जगत से पूरी तरह कट चुके थे। कड़कड़ाती ठंड और भक्त की परीक्षा पौष का महीना था। वृन्दावन में हाड़ कँपाने वाली ठंड पड़ रही थी। यमुना से उठती बर्फीली हवाएं शरीर को चीर रही थीं। फूलडोल बाबा के पास तन ढकने के लिए केवल एक फटी हुई सूती चदरिया थी। वे थर-थर कांप रहे थे, लेकिन उनकी जिह्वा पर 'नाम' का जाप थमा नहीं था। तभी मध्य रात्रि में, एक छोटा सा बालक वहाँ आया। उसके हाथ में एक सुंदर, भारी और गरम काली कमली (कंबल) थी। बालक ने बाबा के पास आकर चुपचाप वह कंबल उनके कंधों पर डाल दिया। बाबा ने आधी खुली आँखों से देखा, बालक की मुस्कान बड़ी मनमोहक थी। बाबा ने पूछा— "लाला, तू कौन है? यह कीमती कंबल मुझे क्यों दे रहा है?" बालक ने हंसकर कहा— "बाबा, मुझे तुम्हारी ठंड देखी नहीं गई। इसे ओढ़ लो, यह तुम्हारी ही है।" इतना कहकर वह बालक अंधेरे में ओझल हो गया। मंदिर में खलबली अगली सुबह जब बांके बिहारी मंदिर के पट खुले, तो पुजारी दंग रह गए। ठाकुर जी के विग्रह पर जो बेशकीमती 'शाही कंबल' रात को ओढ़ाया गया था, वह गायब था! मंदिर के गर्भगृह का ताला बंद था, पहरा सख्त था, फिर कंबल कहाँ गया? चोरी की खबर पूरे वृन्दावन में फैल गई। राजपुरोहित और सिपाही चोर की तलाश में निकले। चमत्कार का प्रकटीकरण ढूंढते-ढूंढते सिपाही यमुना किनारे पहुँचे। वहाँ उन्होंने देखा कि एक फकीर (फूलडोल बाबा) वही शाही कंबल ओढ़े बैठा है जिस पर सोने के काम की नक्काशी थी। सिपाहियों ने तुरंत बाबा को पकड़ा और कहा— "अरे पाखंडी! तूने ठाकुर जी का कंबल चुराया है?" बाबा निर्दोष थे, उन्होंने कहा— "मुझे तो एक छोटा सा बालक देकर गया था।" जब बाबा को खींचकर मंदिर लाया गया और उनके कंधे से वह कंबल हटाया गया, तो एक और चमत्कार हुआ। जैसे ही कंबल हटा, बाबा के शरीर से वैसी ही खुशबू (इत्र की महक) आ रही थी जो केवल बांके बिहारी के विग्रह से आती है। और सबसे बड़ी बात— ठाकुर जी के विग्रह की पीठ पर पसीने की बूंदें चमक रही थीं! अगर आपको कथा संग्रह की पोस्ट पसंद आती है तो आज ही सब्सक्राइब करें कथा संग्रह निष्कर्ष: भगवान का भाव पुजारी समझ गए कि ठाकुर जी स्वयं रात में मंदिर से निकलकर अपने भक्त को ठंड से बचाने गए थे। ठाकुर जी को पसीना इसलिए आ रहा था क्योंकि वे अपने भक्त के कष्ट को देखकर व्याकुल हो गए थे। पुजारियों ने बाबा के चरण पकड़ लिए। सीख: भगवान को छप्पन भोग या सोने के महल नहीं चाहिए; वे तो केवल भाव के भूखे हैं। यदि भक्त का प्रेम सच्चा है, तो भगवान स्वयं चलकर आते हैं, चाहे वह यमराज से लड़ना हो या ठंड में कंबल ओढ़ाना। "भक्त के वश में है भगवान, भक्ति बिना ये कुछ भी नहीं हैं, भक्ति ही इनकी शान।" . *🪷राधे.राधे.राधे.राधे.राधे.li 🪷* *🪷राधे.राधे.राधे.राधे.li 🪷* *🪷राधे.राधे.राधे.li 🪷*

Comments (3)

Riya Riya 💖💖
Mar 21, 2026
राधे राधे दादाभाई 🙏🙏

Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
Mar 21, 2026
जय श्री कृष्णा जी शुभ रात्रि छोटी बेहन जी 🙏

Riya Riya 💖💖
Mar 21, 2026
🙏🌹 Jai Shree Krishna Radhe Radhe 🌹🙏 Shubh Ratri Vandan Bhaiya Jii 🙏
