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जय माता दी जी 🙏 गढ़ माता मंदिर कांगड़ा का बहुत ही प्राचीन और सिद्ध शक्तिपीठ है जी। आपके वीडियो में जो भीड़ वाली पहाड़ी दिख रही है, वही इस मंदिर की महिमा को दिखाती है। विस्तार से जानकारी: *1. स्थान और नाम:* - कांगड़ा जिले के परौर (Parour) गाँव के पास गढ़ धार की ऊँची पहाड़ी पर स्थित है। - इसे *भयभंजनी गढ़ माता मंदिर* के नाम से भी जाना जाता है। - समुद्र तल से लगभग *1368 मीटर* की ऊँचाई पर है। एक दूसरा प्रसिद्ध गढ़ माता मंदिर चंबा जिले के तेलका के पास 9500 फीट पर है जो हिमाचल-जम्मू कश्मीर बॉर्डर पर है, पर कांगड़ा वाला यही परौर वाला मंदिर है। - चारों तरफ घने देवदार और मिश्रित वन हैं, वहाँ पहुँचते ही अलग ही शांति महसूस होती है। *2. इतिहास:* - स्थानीय मान्यता के अनुसार इसका सम्बन्ध कांगड़ा के गौरवशाली *कटोच राजवंश* से है। कहा जाता है कि राजा संसार चंद या उनके पूर्वजों ने यहाँ स्थित ऐतिहासिक गढ़ (किले) के साथ इस मंदिर का निर्माण कराया था। - मंदिर लगभग 500 साल से भी अधिक पुराना माना जाता है। 57eb *3. मंदिर की विशेषता:* - यहाँ माँ *तीन पिंडी रूपों* में विराजमान हैं। हिमाचल की शक्ति परम्परा में पिंडी स्वरूप का बहुत महत्व है। - भक्त माँ को भय, संकट और विपत्ति को नाश करने वाली *भयभंजनी* के रूप में पूजते हैं। - मुख्य मंदिर के पास ही प्राचीन *काली माता मंदिर* भी है, जहाँ देवी पिंडी रूप में हैं। - मालान, पठियार, लखमंडल, चाहड़ी, धार, नगरी, पालमपुर, नगरोटा और आसपास के लोगों की इसमें बहुत आस्था है और चमत्कार मानते हैं। 57eb *4. मेला और पूजा:* - अश्विन माह की संक्रांति पर यहाँ दो दिवसीय जातर मेले का आयोजन होता है, आपके वीडियो में वही भीड़ दिख रही है - हजारों श्रद्धालु पैदल चढ़ाई करके दर्शन करते हैं। - यहाँ हर साल शतचंडी महायज्ञ, जलयात्रा, रुद्राभिषेक और विशाल भंडारा और जागरण होता है। कांगड़ा आयें तो परौर होते हुए गढ़ माता के दर्शन जरूर करें। रास्ता थोड़ा चढ़ाई वाला है, तो सुबह जल्दी जाना अच्छा रहता है जी। जय गढ़ माता दी 🙏

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