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SHREE SHARMA

156 days ago

. “शिक्षक की परीक्षा” एक पण्डितजी थे। उनके प्रवचन दूर-दूर तक मशहूर थे। एक दिन उन्हें पास के एक गांव के एक मन्दिर में पुजारी नियुक्त किया गया। वह गांव जाने के लिए बस में सवार हुए। उन्होंने कंडक्टर को किराया दिया। पैसे लौटाते समय कंडक्टर ने उन्हें 50 रुपए ज्यादा दे दिए। पण्डितजी ने नोट रख लिया। उनके मन में यह ख्याल आया कि कंडक्टर अपना 50 रुपए का नोट लेने जरूर आएगा। पांच मिनट बीत गए, लेकिन वह नहीं आया। उन्होंने मन ही मन सोचा कि बस मालिक तो लाखों रुपए कमाता है। यदि मैं 50 रुपए रख भी लूँगा, तो क्या फर्क पड़ेगा ? इतने में गांव आ गया। वह बस से उतर तो गए, लेकिन उनका मन नहीं माना। उन्होंने कंडक्टर को 50 रुपए वापस देते हुए कहा–‘किराया लौटाते समय तुमने मुझे 50 रुपए ज्यादा दे दिए थे।’-इस पर कंडक्टर ने जो कहा, वह सुनकर पण्डितजी के होश उड़ गए। कंडक्टर ने पूछा–‘क्या आप ही इस गांव के मन्दिर के नए पुजारी हैं ? पण्डितजी ने हाँ कहकर सिर हिला दिया। कंडक्टर ने कहा–‘मैं कई दिनों से आपके प्रवचन सुनना चाहता था। आपको बस में देखा, तो मेरे मन में यह जानने की इच्छा हुई कि यदि मैं आपको अधिक पैसे दे दूँ, तो आप क्या करते हैं ? अब मुझे विश्वास हो गया कि आपके प्रवचन जैसा ही, आपका आचरण है।’ पण्डितजी ने भगवान का शुक्रिया अदा करते हुए कहा–‘हे प्रभु ! आपने मुझे बचा लिया। मैंने तो 50 रुपये के लालच में आपकी शिक्षाओं की बोली लगा दी थी। आपने सत्य की शिक्षा देने वाले शिक्षक की ही परीक्षा ले ली। हर कदम पर हमारे कर्मों की परीक्षा चलती है। अच्छा आचरण कीजिए। ० ० ० ॥जय जय श्री राधे॥

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