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पतंजलि योगसूत्र और तंत्र परंपरा के अनुसार मानव शरीर स्वयं सूक्ष्म ब्रह्माण्ड (Microcosm) है। शरीर में भी एक धुरी है — सुषुम्ना नाड़ी, जिसके दोनों ओर इड़ा और पिंगला नाड़ियाँ चलती हैं। ऊर्जा (कुंडलिनी) जब सुषुम्ना में जागृत होकर ऊपर की ओर बढ़ती है, तो मनुष्य ब्रह्म से एकाकार होता है। यह सूक्ष्म संरचना Axis of alignment का प्रतीक है — जैसे ब्रह्माण्ड की अपनी "सुषुम्ना नाड़ी" है जिसके सहारे ऊर्जा-विस्तार होता है।

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