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25.9.2025 पशु पक्षियों से प्रेम करना, उनको भोजन खिलाना, उनके जीवन की रक्षा करना, उनका पालन पोषण करना आदि बहुत अच्छी बात है। यह शुभ कर्म है। *"जैसे गाय घोड़ा कुत्ता भेड़ बकरी आदि पशुओं को पालना। ये ग्राम्य पशु कहलाते हैं अर्थात गांव में रहते हैं। मनुष्यों के पास रहते हैं। मनुष्य इनका पालन करते हैं। और इनसे कुछ लाभ भी उठाते हैं।"* इसी प्रकार से कुछ लोग पक्षी प्रेमी होते हैं। जैसे कोई व्यक्ति तोता पाल लेता है, कोई मैना पाल लेता है आदि आदि। इन पक्षियों को पालने के लिए वे लोग पिंजरा खरीद लेते हैं। और इन पक्षियों को पिंजरे में बंद करके रखते हैं। ऐसा करना उचित नहीं है। एक तो ईश्वर ने पहले ही उन्हें पक्षी बनाकर दंड दे रखा है। *"यह पशु पक्षी आदि शरीर एक प्रकार से ईश्वर द्वारा बनाई हुई जेल है, अर्थात एक जेल तो ईश्वर ने स्वयं ही उन्हें दे रखी है। और दूसरी जेल मनुष्य, पक्षियों को पिंजरे में डालकर दे देता है। तो यह उनके साथ उचित व्यवहार नहीं लगता।"* *"यदि आप पक्षी प्रेमी हैं, पक्षियों की चहचहाहट सुनना चाहते हैं, उन्हें देखना और प्रसन्न होना चाहते हैं, तो इसके लिए आप उन्हें पिंजरे में बंद न करें। बल्कि अपने घर में या घर के आसपास वृक्ष लगाएं।" "वृक्षों पर अनेक प्रकार के पक्षी आते हैं। घोसला बनाते हैं। चहचहाते हैं। उन्हें देखने से और उनकी आवाज सुनने से मनुष्यों को प्रसन्नता होती है। और मनुष्य लोग उन्हें दाना चारा खिलाकर उनके जीवन की रक्षा कर सकते हैं।" "इस प्रकार से मनुष्यों का मन भी प्रसन्न हो जाएगा, और पक्षियों की रक्षा भी हो जाएगी। इससे मनुष्यों को बहुत सा पुण्य भी मिलेगा।"* पिंजरे में बंद करके रखने से तो बेचारे पक्षी आदि परेशान होते हैं। एक प्रकार से उनकी डबल जेल हो जाती है। *"उनकी एक जेल तो पक्षी बनाकर ईश्वर ने कर रखी है। और उनकी दूसरी जेल, मनुष्य लोग उनको पिंजरे में डालकर बना देते हैं।"* यह उनके प्रति अच्छा व्यवहार नहीं है। *"इसलिए पक्षी आदि प्राणियों की डबल जेल न करें। वृक्ष लगाकर उनके जीवन की रक्षा भी करें, और उन्हें देखकर उनकी आवाज सुनकर प्रसन्न भी होवें। यही उत्तम है।" "अतः पिंजरे खरीदने की अपेक्षा वृक्ष लगाएं। वह अधिक उपयोगी एवं पुण्यदायक है।"*

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