
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
186 days ago
बरसाना की लाठमार होली पूरी दुनिया में अपनी अनूठी परंपरा, उमंग और 'प्रेम भरी मार' के लिए प्रसिद्ध है। यह केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि भगवान कृष्ण और राधा रानी के प्रेम की एक जीवंत झलक है। यहाँ इस उत्सव से जुड़ी कुछ खास बातें दी गई हैं: 🌸 परंपरा की जड़ें यह परंपरा द्वापर युग से चली आ रही है। माना जाता है कि नंदगांव से कृष्ण अपने सखाओं के साथ राधा रानी के गांव बरसाना होली खेलने आते थे और गोपियों को छेड़ते थे। जवाब में गोपियां उन्हें सबक सिखाने के लिए लाठियां चलाती थीं। आज भी वही परंपरा जीवंत है। 🛡️ कैसे खेली जाती है यह होली? * हुरियारे और हुरियारिन: नंदगांव के पुरुषों को 'हुरियारे' और बरसाना की महिलाओं को 'हुरियारिन' कहा जाता है। * ढाल और लाठी: पुरुष अपने पास एक मजबूत ढाल रखते हैं, जबकि महिलाएं मजबूत लाठियां (लठ) चलाती हैं। * प्रेम की मार: यह मुकाबला हिंसक नहीं होता। पुरुष ढाल से अपना बचाव करते हैं और महिलाएं पूरे उत्साह के साथ उन पर लाठियां बरसाती हैं। इस दौरान हंसी-ठिठोली और लोकगीत (होरी) गाए जाते हैं। * अगला दिन: बरसाना में होली के अगले दिन यही प्रक्रिया उलट जाती है, जब बरसाना के पुरुष नंदगांव जाते हैं। ✨ मुख्य आकर्षण * समाज गायन: रंगीली गली और लाड़ली जी मंदिर (राधा रानी मंदिर) में पारंपरिक पदों का गायन होता है। * ठंडाई और गुलाल: टेसू के फूलों के प्राकृतिक रंग और ठंडाई का दौर पूरे उत्सव में जोश भर देता है। * पीली पोखर: होली खेलने के बाद हुरियारे 'पीली पोखर' पर जाकर हाथ-मुंह धोते हैं और विश्राम करते हैं। 📅 विशेष जानकारी (2026) आज 25 फरवरी 2026 है। फाल्गुन मास की शुरुआत हो चुकी है और ब्रज में होली की तैयारियाँ जोरों पर होंगी। बरसाना की मुख्य लाठमार होली आमतौर पर फाल्गुन शुक्ल नवमी को मनाई जाती है। > नोट: यदि आप वहां जाने का मन बना रहे हैं, तो दोपहर से ही 'रंगीली गली' में अपनी जगह सुरक्षित कर लें, क्योंकि वहां लाखों की भीड़ जुटती है। > आपको और आपके पूरे परिवार को लाठमार होली की हार्दिक शुभकामनाएं! 🌸🎨 ब्रज की इस पावन परंपरा की तरह आपके जीवन में भी प्रेम, आनंद और उत्साह की लाठियां बरसती रहें और मन खुशियों के रंगों से सराबोर रहे। ✨ आपके लिए ब्रज की एक खास बधाई: > "नंदगांव के हुरियारे, बरसाने की नार, > धूम मची है भारी, मची है जय-जयकार! > राधा रानी की कृपा आप पर सदा बनी रहे।" > चूंकि आज 25 फरवरी है और ब्रज में उत्सव का माहौल शुरू हो चुका है,
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