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*जीवन मृत्यु का ज्ञान, गरुण पुराण के अनुसार ?* *एक समय वैकुंठ धाम में दिव्य शांति छाई हुई थी। चारों ओर सुनहरी रोशनी फैली थी देवगण भगवान विष्णु की स्तुति कर रहे थे। भगवान विष्णु शेषनाग पर विराजमान थे और उनके पास उनके प्रिय वाहन गरुड़ जी बैठे थे। गरुड़ जी के मन में एक प्रश्न कई दिनों से चल रहा था। वे सोच रहे थे कि मनुष्य जन्म लेता है जीवन जीता है और एक दिन मृत्यु को प्राप्त हो जाता है लेकिन उसके बाद आत्मा का क्या होता है? अंततः गरुड़ जी ने विनम्र होकर भगवान विष्णु से पूछा हे प्रभु! मनुष्य की मृत्यु के बाद उसकी आत्मा कहाँ जाती है उसे सुख या दुख कैसे मिलता है?* *कृपया मेरे इस संदेह को दूर करें। भगवान विष्णु मुस्कुराए और बोले हे गरुड़, इस संसार में हर मनुष्य अपने कर्मों के अनुसार फल प्राप्त करता है। जो व्यक्ति सत्य बोलता है, दया करता है, दूसरों की सहायता करता है और धर्म के मार्ग पर चलता है, उसकी आत्मा को शांति और शुभ फल प्राप्त होते हैं।* *फिर भगवान ने आगे कहा, “लेकिन जो मनुष्य छल कपट झूठ अन्याय और पाप करता है, उसे अपने कर्मों का दंड भी भुगतना पड़ता है। मृत्यु के बाद आत्मा एक यात्रा पर निकलती है, जहाँ उसके हर कर्म का लेखा-जोखा होता है। गरुड़ जी ध्यान से सब सुनते रहे। भगवान विष्णु ने उन्हें यमलोक, कर्मों के परिणाम और जीवन के रहस्य विस्तार से समझाए। उन्होंने कहा मनुष्य के अच्छे और बुरे कर्म कभी नष्ट नहीं होते। समय आने पर हर कर्म का फल अवश्य मिलता है।* *गरुड़ जी ने हाथ जोड़कर कहा, हे प्रभु, आज मेरी सभी शंकाएँ दूर हो गईं। अब मैं समझ गया कि मनुष्य का सबसे बड़ा धन उसके अच्छे कर्म हैं। तब भगवान विष्णु बोले, जो व्यक्ति धर्म, सत्य और दया के मार्ग पर चलता है, वही वास्तव में जीवन का सही अर्थ समझ पाता है। तभी से यह ज्ञान गरुड़ पुराण के रूप में संसार में प्रसिद्ध हुआ और लोगों को जीवन का सही मार्ग दिखाने लगा।*

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