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13.2.2026 बहुत से लोग जीवन को जी नहीं रहे, बल्कि जैसे तैसे काट रहे हैं। जब कोई व्यक्ति उनसे पूछता है, कि *"अरे भाई! बताओ, आप का जीवन कैसा चल रहा है?"* तो बहुत से लोग ऐसा उत्तर देते हैं कि *"बस, जिंदगी कट रही है।"* जीवन जीने और उसे काटने में बहुत अंतर है। *"जीवन जीने का अर्थ है, प्रसन्नता आनंद उत्साह एवं निर्भयता से जीना।" और "जिंदगी काटने का मतलब है, मुसीबत परेशानी तनाव चिताओं आदि से घिरे रहते हुए, बस यूं ही टाइम पास करते रहना।"* तो बहुत से लोग जीवन को काट रहे हैं, जी नहीं रहे। यदि आप जीवन को जीना चाहते हों, तो उसका उपाय है, कि *"अपने कार्यों को पूरी ईमानदारी समर्पण और स्थिरता के साथ करें। आपके अंदर झूठ छल कपट धोखा बेईमानी आदि दोष न हों। कार्य के प्रति आपकी पूरी लगन हो। बेमन से कार्य न करें, उत्साह से करें। आप के विचारों और निर्णय में स्थिरता हो। पहले तो सोच समझ कर निर्णय लेवें कि कौन सा काम ठीक है, किस काम को करना है? फिर जिस काम को करने का निर्णय कर लिया, तो उसको पूरा करने में पूरी शक्ति लगानी है।"* *"यदि आप ऐसा सोच कर सब कार्य करें। तो आप भी निश्चित रूप से आनंदित प्रसन्न उत्साहित और निर्भीक होकर जीवन जिएंगे। इसी का नाम वास्तव में जीवन जीना है। अतः जीवन को काटें नहीं, बल्कि उत्साह से जिएं।"* ---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात."*

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