
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
103 days ago
*📿प्रथम पंक्ति:- मन की शंका काटिए, त्रिशूल धार त्रिपुरारि।* इस पंक्ति में भक्त महादेव से प्रार्थना कर रहा है कि हे त्रिपुरारि! हे अपने हाथों में दिव्य त्रिशूल धारण करने वाले प्रभु, आप मेरे मन के समस्त संशयों, भ्रमों, डरों और अज्ञानता रूपी शंकाओं का समूल नाश कर दीजिए। जिस प्रकार आपका त्रिशूल अदम्य नकारात्मक शक्तियों का संहार करता है, उसी प्रकार वह मेरे भीतर की दुविधाओं को भी काट दे, ताकि मन में केवल विशुद्ध भक्ति और शांति का वास हो। *📿द्वितीय पंक्ति: महादेव के नाम से, तरे सकल संसारी ॥* इस पंक्ति में महादेव के नाम की अमोघ महिमा का गान किया गया है। कवि कहता है कि इस घोर संसार-सागर (भवसागर) से पार उतरने के लिए किसी कठिन साधन की आवश्यकता नहीं है; केवल 'महादेव' नाम का सच्चा स्मरण ही पर्याप्त है। जो भी मनुष्य निष्काम भाव से शिव नाम का आश्रय लेता है, वह इस संसार के समस्त कष्टों, बंधनों और आवागमन के चक्र से मुक्त होकर सहज ही मोक्ष को प्राप्त कर लेता है। *📿भावार्थ एवं आध्यात्मिक संदेश* *ॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐ* `यह दोहा पूरी तरह से शरणागति और पूर्ण विश्वास को दर्शाता है। जीवन में जब भी मनुष्य मोह, अज्ञान या मानसिक द्वंद्व (शंका) से घिर जाता है, तो महादेव का त्रिशूल उसकी रक्षा करता है। चित्र में जो भस्म (राख) का गुबार दिखाया गया है, वह भी इसी वैराग्य और संसार की नश्वरता का प्रतीक है—जिसमें से उभरकर 'पीला शिवलिंग' (ज्ञान और दिव्यता का प्रकाश) यह संदेश देता है कि सब कुछ अंततः शिव में ही विलीन होना है, इसलिए उनके नाम का सहारा लेकर संसार से तर जाना ही जीवन का परम लक्ष्य है।` 🙏🔱🚩 *#हर_हर_महादेव🌿* 🔱🔱🔱🔱🔱🔱🔱🔱🔱

Comments (1)

सविता
May 20, 2026
om namah shivay 🙏🌹
