
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
37 days ago
*सुप्रभातम* __________________________ *आत्मनिर्भर* *"अगर मैं आगे नहीं बढ़ सकता, तो तुम्हें भी नहीं बढ़ने दूंगा"* जब दूसरे आगे बढ़ते हैं, तो मन चाहता है कि वे रुक जाएँ या गिर जाएँ। लेकिन जब हम खुद आगे निकलने लगते हैं, तो चाहते हैं कि बाकी सब धीमे चलें ताकि हम सबसे ऊपर बने रहें। यही मानव स्वभाव का सबसे विषैला विरोधाभास है। मैंने महसूस किया कि यह सोच ही मेरी सबसे बड़ी दुश्मन बन गई थी—एक ऐसा मौन ज़हर, जो भीतर ही भीतर मेरी प्रगति को खत्म कर रहा था। असली सफलता दूसरों को गिराने में नहीं, बल्कि हर दिन खुद को बेहतर बनाने में है। *जब कोई व्यक्ति आगे बढ़ने का प्रयास करता है, तो ये लोग आलोचना करके, अफवाहें फैलाकर या टांग खींचकर उसे गिराने की कोशिश करते हैं.* *🇮🇳 BE BHARTIYA BUY BHARTIYA 🇮🇳* __________________________ *वंदे मातरम* *🇮🇳 जय हिंद 🇮🇳* *'लोकल के लिए वोकल बनें'*

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