
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
143 days ago
9.4.2026 जैसे खेत में किसान बीज होता है। गेहूं चना ज्वार बाजरी इत्यादि *"जैसी भी फसल का बीज बोता है, वैसी ही फसल उत्पन्न होती है।"* इसी प्रकार से मनुष्य के मन में भी जो विचार आते हैं, और यदि वे विचार उसके मन में टिक जाते हैं, तो *"यह भी बीज बोने जैसा ही काम है।"* अर्थात जैसे खेत में बीज बोने पर कुछ समय तक उसको खाद पानी दिया जाता है। फिर उसका अंकुर फूटता है, पौधा बनता है। और *"कुछ समय बाद उसी नस्ल की फसल उत्पन्न होती है, जिस नस्ल का बीज बोया गया था।"* ऐसे ही किसी व्यक्ति के मन में जो विचार स्थापित हो जाता है, कुछ समय तक उस पर चिंतन मनन चलता है। फिर *"वह व्यक्ति वैसी ही भाषा बोलता है, और वैसे ही कर्मों का आचरण करता है। और फिर अंत में उसको वैसा ही कर्मों का फल मिलता है, जिस प्रकार का विचार रूपी बीज उसने अपने मन में बोया था।"* तो यदि आप अच्छा फल अर्थात सुख भोगना चाहते हों, तो अच्छा बीज बोएं। अर्थात *"सेवा परोपकार दान दया सभ्यता नम्रता यज्ञ संध्या उपासना प्राणियों की रक्षा माता-पिता की सेवा वेदों का अध्ययन आर्य विद्वानों का सम्मान सत्कार करना इत्यादि शुभ कर्मों से संबंधित विचार अपने मन में स्थापित करें। फिर उन्हें बढ़ाएं। उन पर चिंतन मनन करें। वैसी ही अच्छी भाषा बोलें। वैसे ही अच्छे कर्म करें। तो आपको इसका अच्छा फल अर्थात सुख मिलेगा।"* *"और यदि आप अपने मन में निंदा चुगली ईर्ष्या राग द्वेष अविद्या काम क्रोध लोग अभिमान आदि से संबंधित बुरे विचार स्थापित करेंगे। तो वैसी ही आपकी वाणी होगी, और वैसे ही आपके कर्म होंगे। फिर उनका फल भी वैसा ही अर्थात दुख भोगना पड़ेगा।"* *"अब आप बुद्धिमान हैं। स्वयं देख लीजिए, कि किस प्रकार के विचार आपको अपने मन में स्थापित करने चाहिएं।"* ---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात."*

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