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कितनी गहरी और सच्ची बात कही है महाराज जी ने। संसार में रिश्ते और नाते अक्सर परिस्थितियों के साथ बदलते रहते हैं, लेकिन एक ईश्वर का साथ ही है जो आदि से अंत तक स्थिर रहता है। जब इंसान सब कुछ प्रभु पर छोड़ देता है, तो मन का बोझ अपने आप कम हो जाता है। इसी भाव को व्यक्त करते कुछ विचार आपके लिए: * "भरोसा अगर खुद पर है तो ताकत बन जाता है, और अगर प्रभु पर है तो आपकी ढाल बन जाता है।" * "जग के रिश्ते कच्चे धागे जैसे हैं, जो जरा सी ठेस पर टूट जाते हैं; बस एक परमात्मा का नाम ही है, जो हर हाल में साथ निभाता है।" * "मौन रहकर जो प्रभु का ध्यान करते हैं, उन्हें दुनिया के शोर में भी सुकून मिल जाता है।" राधे राधे जी 🙏 प्रभात बन्दन जी 🙏

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