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🛕꧁ जय माता दी ꧂🛕 दुर्गा सप्तशती, जिसे 'देवी महात्म्य' भी कहा जाता है, मार्कण्डेय पुराण का एक अंश है। इसमें देवी दुर्गा के शौर्य, शक्ति और असुरों पर उनकी विजय की गाथा 700 श्लोकों में वर्णित है। इसकी मुख्य कथा तीन प्रमुख भागों में विभाजित है, जो हमें राजा सुरथ और समाधि नामक वैश्य के माध्यम से सुनाई जाती है। 1. प्रथम चरित्र: मधु-कैटभ वध कथा की शुरुआत तब होती है जब राजा सुरथ और समाधि वैश्य, अपने-अपने जीवन में धोखा मिलने के बाद, महर्षि मेधा के आश्रम में मिलते हैं। महर्षि उन्हें बताते हैं कि यह सब 'महामाया' की शक्ति है। पृष्ठभूमि: सृष्टि के आरंभ में जब भगवान विष्णु क्षीर सागर में योगनिद्रा में थे, तब उनके कान के मैल से मधु और कैटभ नाम के दो भयंकर असुर पैदा हुए। युद्ध: वे ब्रह्मा जी को मारने दौड़े। ब्रह्मा जी ने योगनिद्रा (महामाया) की स्तुति की। परिणाम: देवी ने विष्णु जी को जगाया और उन्होंने उन असुरों का संहार किया। 2. मध्यम चरित्र: महिषासुर मर्दिनी यह सप्तशती का सबसे लोकप्रिय हिस्सा है। असुर का उदय: महिषासुर नामक राक्षस ने स्वर्ग पर अधिकार कर लिया और देवताओं को वहां से निकाल दिया। देवी का प्राकट्य: सभी देवताओं के क्रोध और तेज से एक दिव्य पुंज प्रकट हुआ, जिसने मां दुर्गा का रूप लिया। देवताओं ने उन्हें अपने दिव्य अस्त्र-शस्त्र भेंट किए। युद्ध: देवी और महिषासुर के बीच भीषण युद्ध हुआ। अंत में, जब वह भैंसे का रूप धरकर आया, तब देवी ने उसका वध कर दिया। इसी कारण उन्हें 'महिषासुर मर्दिनी' कहा जाता है। 3. उत्तम चरित्र: शुम्भ-निशुम्भ और चण्ड-मुण्ड यह भाग देवी के विभिन्न रूपों (जैसे काली और अम्बिका) की महिमा बताता है। असुरों का अत्याचार: शुम्भ और निशुम्भ नाम के भाइयों ने तीनों लोकों में आतंक मचा रखा था। माँ काली का उदय: जब असुर चण्ड और मुण्ड देवी को पकड़ने आए, तो देवी के ललाट से माँ काली प्रकट हुईं, जिन्होंने इन दोनों का वध किया (जिससे उनका नाम 'चामुण्डा' पड़ा)। रक्तबीज का अंत: इसके बाद रक्तबीज नामक असुर आया, जिसकी खून की हर बूंद से नया असुर पैदा होता था। काली ने उसका रक्त पीकर उसे समाप्त किया। पूर्ण विजय: अंत में देवी ने शुम्भ और निशुम्भ का वध कर देवताओं को फिर से स्वर्ग का राज्य दिलाया। सप्तशती का सार दुर्गा सप्तशती केवल युद्ध की कहानी नहीं है, बल्कि यह अधर्म पर धर्म और अज्ञान पर ज्ञान की जीत का प्रतीक है। यह हमें सिखाती है कि जब भी संसार में बुराई बढ़ती है, शक्ति का दैवीय रूप उसे नष्ट करने के लिए अवश्य प्रकट होता है। जय माता दी 🙏💫

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Comments (4)

Lal  Singh 🇮🇳🇮🇳

Lal Singh 🇮🇳🇮🇳

Mar 21, 2026

जी जय माता दी जी 🙏

Lal  Singh 🇮🇳🇮🇳

Lal Singh 🇮🇳🇮🇳

Mar 21, 2026

जी जय माता दी जी 🙏

Riya Riya  💖💖

Riya Riya 💖💖

Mar 21, 2026

🙏🌹 jai mata di 🌹🙏

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Mar 21, 2026

🙏🌹 जय माता दी 🙏🌹 सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके शरण्ये त्रयंबिके गौरी नारायणी नमोस्तुते । या देवी सर्व सर्व भुतेषू शक्ति रूपेण संस्थिता नमस्तसयैय नमस्तसयैय नमस्तसयैय नमो नम: 🌹 या देवी सर्व भुतेषू मातृ रूपेण संस्थिता नमस्तसयैय नमस्तसयैय नमस्तसयैय नमो नम: 🌹 या देवी सर्व भुतेषू शक्ति रूपेण संस्थिता नमस्तसयैय नमस्तसयैय नमस्तसयैय नमो नम: जय माता दी 🙏🌹 चतुर्भुजे चतुर्वक्त्रसंस्तुते परमेश्वरी । रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि जय अम्बे माँ 🙏🌹🙏🌹🙏🙏