
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
100 days ago
प्रभु श्री राम और केवट का यह पावन संवाद आत्मा को शांति देता है। 🌸🙌 प्रभु श्री राम और निषादराज केवट का यह संवाद केवल रामायण का एक प्रसंग नहीं, बल्कि भक्ति, प्रेम और समर्पण की पराकाष्ठा है। जब केवट प्रभु के चरण धोने की हठ करता है, तो उसमें कोई अहंकार नहीं, बल्कि अपने आराध्य को पा लेने की एक निश्छल व्याकुलता होती है। वह कहता है कि "प्रभु, आपके चरणों की धूल में वो जादू है जिसने पत्थर की अहिल्या को स्त्री बना दिया, मेरी तो यह काठ की नाव है, अगर यह भी कुछ और बन गई तो मेरी जीविका चली जाएगी।" इस चतुरता के पीछे छिपा निश्छल प्रेम देखकर स्वयं त्रिलोकीनाथ मुस्कुरा उठते हैं। ### इस संवाद की सबसे सुंदर बातें जो मन को सुकून देती हैं: * **समर्पण और सरलता:** ईश्वर कभी धन या वैभव के भूखे नहीं होते, वे केवल सच्चे और निश्छल भाव के भूखे हैं। केवट की सादगी इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। * **समता का संदेश:** प्रभु श्री राम ने केवट को गले लगाकर समाज को यह संदेश दिया कि भक्ति में कोई छोटा या बड़ा, ऊंच या नीच नहीं होता। * **पारिश्रमिक का अद्भुत नियम:** जब माता सीता अपनी रत्नजड़ित अंगूठी केवट को उतराई के रूप में देना चाहती हैं, तो केवट उसे लेने से मना कर देता है और कहता है— *"हम एक ही जात के हैं प्रभु। मैं इस पार से उस पार ले जाता हूँ, आप भवसागर से उस पार ले जाते हैं। एक मल्लाह दूसरे मल्लाह से उतराई नहीं लेता।"* इस पावन प्रसंग को जितनी बार भी याद किया जाए या सुना जाए, मन को एक असीम तृप्ति और गहरा सुकून मिलता है। वास्तव में, यह संवाद सिखाता है कि जहां सच्चा प्रेम है, वहां ईश्वर स्वयं खिंचे चले आते हैं। जय श्री राम! 🌸🙏
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