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कर्म लौट कर आएगा हि क्यों की उसका हिसाब सही है। **कर्म के सिद्धांत (Law of Karma)** को सर्वोच्च माना गया है, जिससे स्वयं भगवान भी अछूते नहीं रहे। रामायण और महाभारत के अनुसार, भगवान राम द्वारा बाली को छिपकर तीर मारने की घटना और उसके बाद मिले "कर्म फल" की कहानी कुछ इस प्रकार है: ## बाली वध और राम का तर्क रामायण के किष्किंधा कांड में जब प्रभु श्री राम ने पेड़ के पीछे छिपकर बाली पर तीर चलाया, तो मरते समय बाली ने राम से यही सवाल किया था कि उन्होंने धर्म के रक्षक होकर भी ऐसा छिपकर वार क्यों किया? तब श्री राम ने इसके दो मुख्य कारण दिए थे: * **बाली का पाप:** बाली ने अपने छोटे भाई सुग्रीव को राज्य से निकाल दिया था और उसकी पत्नी रूमा को जबरन अपने पास रखा था। शास्त्रों के अनुसार, छोटे भाई की पत्नी पुत्री के समान होती है। इस पाप के लिए बाली को दंड देना अनिवार्य था। * **बाली का वरदान:** बाली को वरदान था कि जो भी उसके सामने युद्ध करने आएगा, उसकी आधी ताकत बाली में समा जाएगी। इसलिए सामने से लड़कर उसे हराना धर्म की रक्षा के लिए व्यावहारिक नहीं था। ## कर्म का चक्र: द्वापर युग में वापसी भले ही श्री राम का उद्देश्य धर्म की स्थापना था, लेकिन "छिपकर प्रहार करने" के इस कर्म का फल उन्हें अपने अगले अवतार में भोगना पड़ा। > **"कर्म का पहिया घूमकर वहीं आता है, जहां से उसकी शुरुआत होती है।"** > जब द्वापर युग में भगवान राम ने **श्री कृष्ण** के रूप में अवतार लिया, तब उनके जीवन के अंत का कारण यही कर्म बना: * **जरा व्याध (बहेलिया):** त्रेतायुग का बाली ही द्वापर युग में 'जरा' नाम का बहेलिया (शिकारी) बनकर जन्मा। * **वही छिपकर वार:** जब श्री कृष्ण एक पेड़ के नीचे योग निद्रा में विश्राम कर रहे थे, तब जरा बहेलिए ने दूर झाड़ियों के पीछे से श्रीकृष्ण के पैर के अंगूठे को हिरण की आंख समझकर तीर चला दिया। * **न्याय की पूर्णता:** जिस तरह राम ने पेड़ के पीछे छिपकर बाली पर तीर चलाया था, ठीक उसी तरह जरा बहेलिए ने झाड़ी के पीछे छिपकर कृष्ण पर तीर चलाया। इसी तीर के कारण श्री कृष्ण ने अपनी देह त्यागी और बैकुंठ लौट गए। ## इस कथा से सीख यह प्रसंग हमें सिखाता है कि संसार में **कर्म से बड़ा कोई नहीं है**। जब साक्षात ईश्वर को भी मनुष्य रूप में आने पर अपने फैसलों और कर्मों का परिणाम भुगतना पड़ा, तो साधारण मनुष्यों के कर्मों का हिसाब तो निश्चित ही है। इसलिए हमेशा धर्म और सजगता के मार्ग पर चलना चाहिए।

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