
SHREE SHARMA
23 days ago
जब द्रवहिं दीनदयाल राघव, साधु संगति पाइये । जेहिं दरस-परस समागमादिक, पाप रासि नसाइये ।। जब दीनों पर दया करने वाले करुणामय श्री राम जी कृपा करते हैं, तभी मनुष्य को सच्चे संतों का संग प्राप्त होता है, उस साधु-संगति में संतों के दर्शन करने, उनके चरण छूने और उनके साथ विचार-विमर्श व सत्संग करने से जन्म-जन्मांतरों के पापों का समूह नष्ट हो जाता है अर्थात मनुष्य के संचित पाप केवल बाहरी अनुष्ठानों से नहीं, बल्कि आंतरिक शुद्धि से धुलते हैं, साधु-संगति मन के विकारों (काम, क्रोध, लोभ, मोह) को दूर करती है, जिससे जीवन की दिशा बदलती है और समस्त पाप समूह स्वतः नष्ट हो जाते हैं। जय सियाराम 🙏

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