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भारतीय दर्शन: शिव अनंत हैं, पर उनमें सीमित जीव भी स्थित हैं। विज्ञान: ब्रह्माण्ड अनंत की ओर फैल रहा है, पर हम सीमित रूपों में इसे देखते हैं। सीमित-अनंत का संवाद – हर सीमित वस्तु (मनुष्य, समाज, संस्कृति) किसी अनंत ऊर्जा का अंश है। यह विचार "चेतना-अध्ययन", "क्वांटम चेतना" और "सामूहिक मन" जैसी अवधारणाओं को गहराई दे सकता है। 🌌💫🔍💭

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