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राजस्थान के अलवर जिले में स्थित भानगढ़ का किला भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया की सबसे रहस्यमयी और डरावनी जगहों में गिना जाता है। सरिस्का टाइगर रिजर्व की सीमा पर स्थित इस किले को "भूतिया किला" कहा जाता है और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने भी यहाँ सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले प्रवेश पर सख्त पाबंदी लगा रखी है। इस किले के "भूतिया" होने के पीछे दो मुख्य कहानियाँ प्रचलित हैं: 1. राजकुमारी रत्नावती और तांत्रिक सिंधिया का श्राप सबसे प्रसिद्ध कहानी राजकुमारी रत्नावती से जुड़ी है, जो अपनी सुंदरता के लिए प्रसिद्ध थीं। कहा जाता है कि सिंधिया नाम का एक तांत्रिक राजकुमारी पर मोहित हो गया और उसने काले जादू के जरिए उन्हें वश में करने की कोशिश की। उसने राजकुमारी के लिए जा रहे इत्र की शीशी पर वशीकरण मंत्र पढ़ दिया। लेकिन राजकुमारी को तांत्रिक की चाल का पता चल गया और उन्होंने वह शीशी एक बड़ी चट्टान पर पटक दी। जादू के प्रभाव से वह चट्टान तांत्रिक की ओर लुढ़कने लगी और उसे कुचल दिया। मरने से पहले तांत्रिक ने श्राप दिया कि भानगढ़ पूरी तरह तबाह हो जाएगा और यहाँ रहने वालों की आत्माएं कभी मुक्त नहीं होंगी। 2. गुरु बालू नाथ की शर्त एक अन्य मान्यता के अनुसार, इस किले का निर्माण राजा भगवंत दास ने अपने छोटे बेटे माधो सिंह के लिए करवाया था। वहाँ रहने वाले एक तपस्वी गुरु बालू नाथ ने इस शर्त पर निर्माण की अनुमति दी थी कि महल की परछाई उनके साधना स्थल पर नहीं पड़नी चाहिए। लेकिन माधो सिंह के उत्तराधिकारियों ने महल को इतना ऊँचा बनवा दिया कि उसकी परछाई साधु की कुटिया पर पड़ गई, जिससे क्रोधित होकर उन्होंने पूरे नगर को विनाश का श्राप दे दिया। किले की मुख्य बातें: * इतिहास: इसका निर्माण 16वीं शताब्दी (लगभग 1573) में राजा भगवंत दास ने करवाया था। * स्थापत्य: खंडहर होने के बावजूद आज भी यहाँ के मंदिर (जैसे गोपीनाथ मंदिर और सोमेश्वर मंदिर), बाजार और नर्तकियों की हवेली के अवशेष इसके भव्य अतीत की गवाही देते हैं। * अनुभव: यहाँ आने वाले कई लोग अजीबोगरीब आवाजें सुनने और किसी की मौजूदगी महसूस करने का दावा करते हैं। हालांकि, वैज्ञानिक दृष्टिकोण से यहाँ का सन्नाटा और जंगली जानवरों की आवाजें ही लोगों में डर पैदा करती हैं। भानगढ़ का किला इतिहास प्रेमियों और रोमांच चाहने वालों के लिए एक बहुत ही आकर्षक पर्यटन स्थल है।

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