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🛕꧁ जय द्वारकाधीश꧂🛕 जब गणेश जी ने अपना ही दांत तोड़ दिया! 🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️ क्या आप जानते हैं कि भगवान श्री गणेश को 'एकदंत' क्यों कहा जाता है? इसके पीछे एक बहुत ही महान बलिदान की कथा है। जब महर्षि वेदव्यास ने 'महाभारत' महाकाव्य की रचना करने का विचार किया, तो उन्हें एक ऐसे लेखक की आवश्यकता थी जो उनके मुख से निकलते शब्दों को बिना रुके लिख सके। यह कार्य केवल बुद्धि के देवता गणेश जी ही कर सकते थे। गणेश जी मान तो गए, परंतु उन्होंने एक शर्त रखी— "व्यास जी, यदि आप एक क्षण के लिए भी रुके, तो मैं अपनी लेखनी रोक दूँगा।" व्यास जी ने भी प्रत्युत्तर में कहा— "ठीक है, पर आप भी बिना अर्थ समझे एक शब्द नहीं लिखेंगे।" लेखन का कार्य आरंभ हुआ। अचानक लिखते-लिखते गणेश जी की लेखनी (कलम) टूट गई। यदि वे रुकते तो शर्त टूट जाती। तब बिना एक पल गवाएं, गणेश जी ने अपना एक दांत स्वयं ही तोड़ लिया और उसे स्याही में डुबोकर महाकाव्य लिखना जारी रखा। उन्होंने अपने रूप और सुंदरता की परवाह नहीं की, केवल ज्ञान के संरक्षण को महत्व दिया। सीख: महान उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए यदि हमें अपने अहंकार या बाहरी सौंदर्य का त्याग भी करना पड़े, तो पीछे नहीं हटना चाहिए। ज्ञान और कर्तव्य सर्वोपरि है *🔱शिव.शिव.शिव.शिव.शिव.li 🔱* 🔱शिव.शिव.शिव.शिव.li 🔱 *🔱शिव.शिव.शिव.li 🔱*

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