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*📜 28 फरवरी 📜* *🌹 डॉ. राजेन्द्र प्रसाद // पुण्यतिथि 🌹* *जन्म:* उनका जन्म 3 दिसंबर 1884 को बिहार के सीवान जिले के जीरादेई गाँव में हुआ था। *उनका निधन* 28 फरवरी 1963 को पटना के सदाकत आश्रम में हुआ था। *सादगी की प्रतिमूर्ति:* वे अपनी सरलता और सादगी के लिए जाने जाते थे। राष्ट्रपति पद पर रहते हुए भी उन्होंने अपनी जीवनशैली में कोई बदलाव नहीं किया और राष्ट्रपति भवन को एक "भारतीय घर" जैसा स्वरूप दिया। *सम्मान:* उन्हें वर्ष 1962 में भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' से नवाजा गया था। *ऐतिहासिक भूमिका:* वे भारतीय संविधान सभा के अध्यक्ष थे और एकमात्र ऐसे राष्ट्रपति रहे जिन्होंने दो कार्यकाल (1950–1962) तक इस पद की जिम्मेदारी संभाली। राजेन्द्र प्रसाद एक स्वतंत्र कर्मचारी, सदस्य और बाद में 1950 से भारत के पहले सदस्य थे। वे प्रशिक्षण से एक भारतीय राजनियतक और पत्रकार थे। प्रसाद भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल हो गए और बिहार, महाराष्ट्र के क्षेत्र से एक प्रमुख नेता बन गए। वकालत में पोस्ट ग्रैजुएट डॉ. राजेंद्र प्रसाद महात्मा गांधी के बहुत बड़े समर्थक थे। डॉ. राजेंद्र प्रसाद को 1931 में सत्याग्रह आंदोलन और 1942 में हुए भारत छोड़ो आंदोलन के लिए माहात्मा गांधी के साथ जेल भी जाना पड़ा था। डॉ. राजेंद्र प्रसाद साल 1934 से 1935 तक कांग्रेस के अध्यक्ष भी रहे। 1947 में स्वतंत्रता के बाद, डॉ राजेन्द्र प्रसाद को भारत की संविधान सभा के अध्यक्ष के रूप में चुना गया, जिसने भारत का संविधान तैयार किया और इसकी अंतिम संसद के रूप में कार्य किया। डॉ. राजेंद्र प्रसाद, स्वतंत्र भारत के प्रथम राष्ट्रपति और भारत रत्न से सम्मानित पुण्यात्मा के जन्मदिन को स्मरण करते हुए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद प्रति वर्ष देशभर में 3 दिसंबर को पूरे जोश और उत्साह के साथ 'कृषि शिक्षा दिवस' मनाता है। 28 फरवरी, 1963 को डॉ. राजेन्द्र प्रसाद का निधन हो गया। उनके जीवन से जुड़ी कई ऐसी घटनाएं है जो यह प्रमाणित करती हैं कि राजेन्द्र प्रसाद बेहद दयालु और निर्मल स्वभाव के थे। भारतीय राजनैतिक इतिहास में उनकी छवि एक महान और विनम्र राष्ट्रपति की है। पटना में प्रसाद जी की याद में ‘राजेन्द्र स्मृति संग्रहालय’ का निर्माण कराया गया। 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

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