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0️⃣4️⃣❗1️⃣0️⃣❗2️⃣0️⃣2️⃣5️⃣ *"आत्मा की पुकार और कर्मों का बंधन"* यह जीवन केवल भौतिक वस्तुओं या संबंधों के लिए नहीं मिला है। हर जन्म में यह सब मिलता ही रहा है, परन्तु हर बार इन्होंने मुक्ति के मार्ग को अवरुद्ध कर हमें और अधिक बंधनों में जकड़ दिया। संसार के सुखों की चाह में, इच्छाओं के वशीभूत होकर हम जाने-अनजाने ऐसे कर्म कर बैठते हैं, जो हमारी आत्मा को रुला देते हैं। भीतर से आत्मा बार-बार चेतावनी देती है— "यह मत करो, यह पाप है, मेरी दुर्गति मत करो", पर विकारों की तीव्रता इतनी होती है कि हम उस आवाज को अनसुना कर अपनी आत्मा को और गहरे अंधकार में धकेल देते हैं। जो कुछ भी हमारे जीवन में घटित हो रहा है, उसका उत्तरदायित्व किसी और पर नहीं, केवल हमारे अपने कर्मों पर है। प्रकृति तो मात्र एक दर्पण है, जो हमारे ही कर्मों को किसी न किसी रूप में हमारे समक्ष प्रत्यक्ष करती है। जब लोग कहते हैं— "मेरे साथ गलत ही होता है", "मुझे गलत लोग ही मिलते हैं", तब वे अपने ही भूतकाल के कर्मों की प्रतिध्वनि सुन रहे होते हैं। हमने जो कुछ भी बोया है, वही काटना अनिवार्य है। कर्मों की ऊर्जा अदृश्य होते हुए भी, समय के चक्र में सदैव सक्रिय रहती है। आज जो विचार, वाणी और आचरण हम अपनाते हैं, वही हमारा कल गढ़ते हैं। इसलिए आवश्यक है— अपने भीतर की आत्मा की पुकार को सुनना। विकारों को क्षणिक सुख मानकर जीवन का स्थायी पतन न कर बैठना। उस अंतरात्मा की चेतावनी को गंभीरता से समझना जो हमें सही निर्णय लेने में मार्गदर्शन करती है। जो लोग क्षणिक भौतिक सुखों की प्राप्ति के लिए अपने चरित्र, धर्म और आत्मा का सौदा कर लेते हैं, वे ही आगे चलकर अपने जीवन को नरक बना लेते हैं। मुक्ति का मार्ग बाहर नहीं, भीतर से आरंभ होता है। जब हम आत्मा की पुकार को सुनना प्रारंभ कर देंगे, तब प्रकृति भी हमारे कर्मों के अनुसार हमें उचित मार्ग पर अग्रसर कर देगी। "अपने भीतर के सत्य को पहचानो, तभी बाहरी जीवन में भी शांति और मुक्ति का अनुभव होगा..!!" *🙏🏽🙏🏿🙏🏾जय श्री कृष्ण*🙏🏻🙏🙏🏼

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Comments (4)

Lal  Singh 🇮🇳🇮🇳

Lal Singh 🇮🇳🇮🇳

Oct 4, 2025

जय श्री कृष्णा जी शुभ दुपहर आपका दिन मंगलमया हो 🙏

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Oct 4, 2025

Bahut hi Sundar Barta 👌👌🙏

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Oct 4, 2025

Jai Shree Krishna 🙏 Radhe Radhe 🙏 Subha Dopahar Jii 🙏🌹🌹