
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
325 days ago
जप के मुख्य प्रकार हैं वाचिक (जोर से बोलना), उपांशु (बहुत धीरे या बिना बोले होंठ हिलाना), और मानस (मन ही मन करना)। वाचिक जप जोर से बोला जाता है, उपांशु जप बहुत धीमी आवाज़ में होता है जिसे दूसरों द्वारा सुना न जा सके, और मानस जप पूरी तरह से मन में मंत्र का चिंतन करना है। इसके अलावा, जप के संदर्भ में सगर्भ जप (प्राणायाम के साथ) और अगर्भ जप (प्राणायाम के बिना) भी होते हैं। मुख्य प्रकार 1. वाचिक जप: इस प्रकार के जप में मंत्र का स्पष्ट और जोर से उच्चारण किया जाता है, जिसे दूसरे लोग सुन सकते हैं। यह हवन-जैसे अनुष्ठानों में किया जाता है। 2. उपांशु जप: इसमें मंत्र का उच्चारण इतना हल्का होता है कि केवल जिह्वा हिलती है और उसे आसपास के लोग सुन नहीं पाते। 3. मानस जप: यह जप मन ही मन किया जाता है, जहाँ मंत्र के अक्षर, पद, शब्द और अर्थ का बार-बार चिंतन किया जाता है। इसे साधना की उच्च कोटि का जप माना जाता है। अन्य प्रकार सगर्भ जप: इस जप में प्राणायाम किया जाता है और मंत्र जप के साथ ही साँसों पर ध्यान केंद्रित किया जाता है। अगर्भ जप: इसमें जप से पहले और बाद में प्राणायाम किया जाता है। लिखित जप: इसमें मंत्र को कागज पर लिखा जाता है, जिससे एकाग्रता बढ़ती है। जप के फल वाचिक जप एक गुना फल देता है। उपांशु जप सौ गुना फल देता है। मानस जप हज़ार गुना फल देता है। सगर्भ जप मानस जप से भी श्रेष्ठ माना जाता है।

Comments (1)

Pannalal Chouhan
Oct 9, 2025
राम राम जी
