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SHREE SHARMA

104 days ago

आज से अधिक ज्येष्ठ मास अर्थात मलमास / पुरुषोत्तम मास प्रारंभ हो रहा है, जो 15 जून तक रहेगा। सनातन परंपरा में इस पूरे माह को जप, तप, दान, पूजा-पाठ और भगवान विष्णु की भक्ति के लिए अत्यंत पुण्यकारी माना गया है। इस अवधि में सभी मांगलिक कार्य वर्जित माने गए हैं ... 💥 ....अधिक मास क्या होता है….🔆 हिंदू कैलेंडर में हर तीन साल में एक बार एक अतिरिक्त माह का प्राकट्य होता है, जिसे अधिकमास, मल मास या पुरुषोत्तम मास के नाम से जाना जाता है। हिंदू धर्म में इस माह का विशेष महत्व है। ऐसा माना जाता है कि अधिकमास में किए गए धार्मिक कार्यों का किसी भी अन्य माह में किए गए पूजा-पाठ से 10 गुना अधिक फल मिलता है। 🌺 भारतीय गणना पद्धति के अनुसार प्रत्येक सूर्य वर्ष 365 दिन और करीब 6 घंटे का होता है। वहीं चंद्र वर्ष 354 दिनों का माना जाता है। दोनों वर्षों के बीच लगभग 11 दिनों का अंतर होता है, जो हर तीन वर्ष में लगभग 1 मास के बराबर हो जाता है। इसी अंतर को पाटने के लिए हर तीन साल में एक चंद्र मास अस्तित्व में आता है, जिसे अतिरिक्त होने के कारण अधिकमास का नाम दिया गया है। 🌺 मल मास क्यों कहा गया—- अधिकमास के दौरान सभी पवित्र कर्म वर्जित माने गए हैं। माना जाता है कि अतिरिक्त होने के कारण यह मास मलिन होता है। इसलिए इस मास के दौरान हिंदू धर्म के विशिष्ट व्यक्तिगत संस्कार जैसे नामकरण, यज्ञोपवीत, विवाह और सामान्य धार्मिक संस्कार जैसे गृहप्रवेश, नई बहुमूल्य वस्तुओं की खरीदी आदि आमतौर पर नहीं किए जाते हैं। मलिन मानने के कारण ही इस मास का नाम मल मास पड़ गया है। 🌺 पुरुषोत्तम मास नाम क्यों—— अधिकमास के अधिपति स्वामी भगवान विष्णु माने जाते हैं। पुरुषोत्तम भगवान विष्णु का ही एक नाम है। इस विषय में एक बड़ी ही रोचक कथा है। कहा जाता है कि भारतीय मनीषियों ने अपनी गणना पद्धति से हर चंद्र मास के लिए एक देवता निर्धारित किए। चूंकि अधिकमास सूर्य और चंद्र मास के बीच संतुलन बनाने के लिए प्रकट हुआ, तो इस अतिरिक्त मास का अधिपति बनने के लिए कोई देवता तैयार ना हुआ। ऐसे में ऋषि-मुनियों ने भगवान विष्णु से आग्रह किया कि वे ही इस मास का भार अपने ऊपर लें। भगवान विष्णु ने इस आग्रह को स्वीकार कर लिया और इस तरह यह मल मास के साथ पुरुषोत्तम मास भी बन गया। 🌺 हिरण्यकश्यपु राक्षस ने वर मांगा था कि उसे संसार का कोई नर, नारी, पशु, देवता या असुर मार ना सके। वह वर्ष के 12 महीनों में मृत्यु को प्राप्त ना हो। जब वह मरे, तो ना दिन का समय हो, ना रात का। वह ना किसी अस्त्र से मरे, ना किसी शस्त्र से। उसे ना घर में मारा जा सके, ना ही घर से बाहर मारा जा सके। समय आने पर भगवान विष्णु ने अधिक मास में ही नृसिम्ह अवतार में प्रकट होकर शाम के समय, देहरी के नीचे अपने नाखूनों से हिरण्यकश्यपु का सीना चीर कर उसका अंत किया था। 🍁🍁अधिक मास में क्या कार्य करें तथा कौनसे कार्य टालें ? 🍁🍁 अधिक मास में किए जानेवाले व्रत, पुण्य कारक कृत्य और इन्हें करने का अध्यात्मशास्त्र अवश्य जान ले । अधिक मास को अगले मास का नाम दिया जाता है, उदा. आश्‍विन मास से पूर्व आनेवाले अधिक मास को ‘आश्‍विन अधिक मास’ कहते हैं ... उसके उपरांत आनेवाले मास को ‘शुद्ध आश्‍विन मास’ कहा जाता है । यह मास किसी बडे पर्व की भांति होता है । इसलिए इस मास में धार्मिक कृत्‍य किए जाते हैं और ‘अधिक मास महिमा’ ग्रंथ का वाचन किया जाता है ।इस मास को ‘मलमास’ कहते हैं ... मलमास में मंगल कार्य की अपेक्षा विशेष व्रत और पुण्‍यकारी कृत्‍य किए जाते हैं; इसलिए इसे ‘पुरुषोत्तम मास’ भी कहते हैं ..

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Comments (1)

Riya Riya  💖💖

Riya Riya 💖💖

May 19, 2026

जय श्री कृष्ण राधे राधे जी 🙏🌹🙏