
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
217 days ago
*🌿 जयश्री सीताराम 🌿* हमारी ज़िंदगी की सबसे बड़ी समस्या यह है-हम हर बात के लिए दूसरों को दोष देते हैं। कुछ गलत हो जाए तो कहते हैं-“उसकी वजह से हुआ; उसने बिगाड़ दिया; परिस्थितियाँ ही खराब थीं; लोग ही गलत हैं…” लेकिन गीता हमें आईना दिखाती है — ~जो कुछ भी हमारे जीवन में हो रहा है,वह हमारे ही कर्मों का परिणाम है। आपकी सफलता-आपके कर्मों का फल है। आपकी असफलता-आपके कर्मों का फल है। आपकी शांति- आपके कर्मों का फल है। और आपकी पीड़ा भी -आपके ही कर्मों का फल है। दूसरों को दोष देना आसान है, लेकिन अपने कर्मों की ज़िम्मेदारी लेना ही जीवन की असली परिपक्वता है। ~कर्म का नियम बहुत सरल है अगर आप चाहते हैं कि लोग आपके साथ अच्छा व्यवहार करें, तो आप पहले अच्छा व्यवहार कीजिए। अगर आप चाहते हैं कि दुनिया आपका सम्मान करे, तो आप पहले सम्मान देना सीखिए। अगर आप चाहते हैं कि लोग आपकी मदद करें, तो आप पहले मदद करना शुरू कीजिए। अगर आप चाहते हैं कि लोग आपसे प्रेम करें, तो आप पहले प्रेम देना सीखिए। आप जो दुनिया से पाना चाहते हैं, पहले वही दुनिया को देना शुरू कीजिए। क्योंकि जीवन एक आईना है-आप जो देते हैं, वही लौटकर आता है। ~ये समस्या हम रोज़ देखते हैं- हम ईर्ष्या करते हैं — फिर कहते हैं, लोग हमें पसंद नहीं करते। हम अपमान करते हैं — फिर कहते हैं, लोग हमें सम्मान नहीं देते। हम कठोर बोलते हैं — फिर कहते हैं, लोग हमसे कठोर हैं। हम दूसरों को नीचा दिखाते हैं — फिर कहते हैं, लोग हमारे खिलाफ हैं। और फिर भी हम पूछते हैं —“मेरे साथ ही ऐसा क्यों होता है?” गीता का उत्तर बहुत स्पष्ट है —क्योंकि आपने वैसा ही कर्म किया है। दोष देना बंद करो — कर्म सुधारो। अगर जीवन बदलना है, तो लोगों को नहीं, अपने कर्मों को बदलो। ~अगर भविष्य बेहतर चाहिए —तो आज बेहतर कर्म करो। जो आप दूसरों से चाहते हैं-वही पहले खुद बनिए। दयालुता चाहते हैं? तो दयालु बनिए। सम्मान चाहते हैं? तो सम्मान दीजिए। ईमानदारी चाहते हैं? तो ईमानदार बनिए। शांति चाहते हैं? तो शांति बोइए। दुनिया आपके कर्मों का प्रतिबिंब है। आप जैसा बीज बोते हैं, वैसा ही फल पाते हैं। ~इसलिए अगली बार जब मन करे किसी और को दोष देने का— तो रुकिए और खुद से पूछिए: “मैंने ऐसा क्या किया था, जो आज यह लौटकर आ रहा है?” यही आत्मचिंतन है। यही कर्मयोग है।और यही गीता का मार्ग है। दोष देना बंद कीजिए। कर्म सुधारिए। जीवन अपने आप सुधर जाएगा। * *स्वस्थ व प्रसन्न रहिए आप सभी को सुभ सन्धेया ...💐* 🕉️ *जयश्री सीताराम*

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