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मन के इसारे पर नही बल्कि प्रभु के इसारे पर चलिए मन तो चंचल है, वह अक्सर हमें भटका देता है, लेकिन जब हम अपनी जीवन रूपी पतंग की डोर उस परमात्मा के हाथों में सौंप देते हैं, तो जीवन में ठहराव और सही दिशा अपने आप आ जाती है। समर्पण का यही भाव मन को शांति और शक्ति दोनों देता है। आज की शुभ संध्या के लिए एक छोटा सा सुविचार: > "जो परमात्मा के विधान में विश्वास रखता है, उसे जीवन के किसी भी मोड़ पर निराशा नहीं घेरती। क्योंकि उसे पता है कि जो हो रहा है, उसमें भी उसकी कृपा है और जो होगा, वह तो मंगलमय होगा ही।" > राधे-राधे! आपकी संध्या मंगलमय और सुखद हो।

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