
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
23 hours ago
गणेश चतुर्थी से लेकर अनंत चतुर्दशी तक बप्पा को हर दिन अलग-अलग पारंपरिक और सात्विक नैवेद्य अर्पित करने की समृद्ध परंपरा है। * **पहला दिन: उकडीचे मोदक** चावल के आटे की परत में ताजा कद्दूकस किया नारियल, गुड़, इलायची और जायफल भरकर भाप में पकाया गया यह मोदक बप्पा का सबसे प्रिय भोग माना जाता है। परोसते समय इस पर शुद्ध देसी घी की धार डाली जाती है। * **दूसरा दिन: मोतीचूर के लड्डू** बारीक बेसन की बूंदियों को शुद्ध घी में तलकर, केसर और इलायची युक्त चाशनी में डुबोकर बनाए गए यह लड्डू गणपति पूजा का अभिन्न हिस्सा हैं। * **तीसरा दिन: पूरन पोली** चना दाल और गुड़ के मीठे मिश्रण (पूरन) को गेहूं या मैदे की लोई में भरकर तवे पर घी के साथ सेकी जाने वाली यह पारंपरिक महाराष्ट्रीयन मीठी रोटी अत्यंत शुभ मानी जाती है। * **चौथा दिन: पंचामृत और केला शीरा (सूजी का हलवा)** दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल के पंचामृत के साथ सूजी, पके केले, मेवे और चीनी से बना दानेदार शीरा सत्यनारायण और गणेश पूजन में विशेष रूप से अर्पित किया जाता है। * **पांचवां दिन: श्रीखंड-पूरी** गाढ़े चक्के (हंग कर्ड) में केसर, पिसी चीनी, इलायची और पिस्ता मिलाकर बना ठंडा श्रीखंड और साथ में गरमा-गरम फूली हुई पूरियां पंचमी के दिन उत्तम मानी जाती हैं। * **छठा दिन: नारियल के लड्डू** कच्चे या सूखे नारियल के लच्छे, कंडेंस्ड मिल्क (या खोया) और इलायची पाउडर से झटपट तैयार होने वाले यह लड्डू बप्पा के प्रिय मिष्ठानों में गिने जाते हैं। * **सातवां दिन: खीर (पायसम)** दूध को गाढ़ा करके बासमती चावल (या मखाने), केसर, इलायची और तले हुए मेवों के साथ धीमी आंच पर पकाई गई पारंपरिक खीर सप्तमी पर भोग लगाने के लिए श्रेष्ठ है। * **आठवां दिन: करंजी (गुझिया)** मैदे की कुरकुरी परत के भीतर सूखा नारियल, खसखस, सूजी, मेवे और पिसी चीनी की स्टफिंग भरकर सुनहरी तली जाने वाली करंजी अष्टमी के दिन अर्पित की जाती है। * **नौवां दिन: मावा / काजू मोदक** खोया (मावा) या काजू के पेस्ट में चीनी और केसर मिलाकर सांचे में ढाले गए सूखे मोदक नवमी के दिन विशेष रूप से चढ़ाए जाते हैं। * **दसवां दिन (विसर्जन): दही-पोहा (गोपालकाला) और बेसन के लड्डू** अनंत चतुर्दशी यानी विदाई के दिन यात्रा के प्रतीक स्वरूप दही, पोहा, ककड़ी, अनार के दाने और जीरे के तड़के से बना सुपाच्य गोपालकाला तथा लंबे समय तक टिकने वाले भुने बेसन के लड्डू अर्पित किए जाते हैं। भोग अर्पित करते समय थाली में ताजे दूर्वा के 21 पत्ते, तुलसी के बिना (गणेश पूजन में तुलसी वर्जित है), और थोड़ा सा आचमन जल साथ रखना न भूलें।
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