
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
175 days ago
*सबको गलत मार्ग पर ले जाने वाले उस छोटे बालक को भगवान शिव ने नष्ट क्यों नहीं किया ?* *क्या आपने कभी नटराज शिव की मूर्ति को ध्यान से देखा है? उनके एक पैर के नीचे एक छोटा सा बालक दबा हुआ दिखाया जाता है। अधिकतर लोग इसे केवल एक कलात्मक आकृति समझते हैं, लेकिन वास्तव में इसके पीछे एक बहुत गहरा आध्यात्मिक रहस्य छिपा हुआ है।* *उस बालक का नाम अपस्मार (Apasmara) है। शैव परंपरा और प्राचीन ग्रंथों के अनुसार, अपस्मार अज्ञान (Ignorance), अहंकार (Ego) और भ्रम (Illusion) का प्रतीक है।* *कथा के अनुसार, अपस्मार को अपने ज्ञान पर बहुत घमंड हो गया था। उसे लगता था कि वह सबसे अधिक ज्ञानी है। धीरे-धीरे उसका अहंकार इतना बढ़ गया कि वह देवताओं, ऋषियों और मनुष्यों को भी भ्रमित करने लगा। वह लोगों को सत्य से दूर ले जा रहा था और उनके मन में भ्रम और अज्ञान फैला रहा था।* *जब अज्ञान और अहंकार ने संतुलन बिगाड़ दिया, तब भगवान शिव ने नटराज रूप धारण किया — यह रूप ब्रह्मांडीय नर्तक (Cosmic Dancer) का प्रतीक है। शिव ने अपना दिव्य तांडव नृत्य किया, जो सृष्टि, स्थिति और संहार — तीनों का प्रतीक माना जाता है।* *तांडव करते हुए शिव ने अपस्मार को अपने दाहिने पैर के नीचे दबा लिया। लेकिन यहाँ सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि शिव ने अपस्मार को मारा नहीं, बल्कि केवल उसे नियंत्रण में रखा।* *इसका अर्थ यह है कि अज्ञान को पूरी तरह समाप्त नहीं किया जाता, बल्कि उसे नियंत्रित किया जाता है। क्योंकि यदि अज्ञान ही नहीं होगा, तो ज्ञान का महत्व भी समझ में नहीं आएगा। अज्ञान ही वह अवस्था है, जिससे निकलकर मनुष्य ज्ञान की ओर बढ़ता है।* *नटराज की पूरी मुद्रा भी एक संदेश देती है:* *उनका एक पैर अपस्मार को दबाकर अज्ञान को नियंत्रित कर रहा है* *दूसरा पैर ऊपर उठा हुआ है, जो मुक्ति (मोक्ष) का प्रतीक है उनका तांडव ब्रह्मांड की ऊर्जा और संतुलन को दर्शाता है इसका सीधा अर्थ हमारे जीवन से जुड़ा है। जब हम अपने अहंकार, भ्रम और अज्ञान को नियंत्रित कर लेते हैं, तभी हम सच्चे ज्ञान और आत्मज्ञान की ओर बढ़ सकते हैं।* *नटराज के पैरों के नीचे दबा अपस्मार हमें हर दिन यह याद दिलाता है कि सबसे बड़ा शत्रु बाहर नहीं, बल्कि हमारे अंदर का अज्ञान और अहंकार है। और जब हम उसे नियंत्रित कर लेते हैं, तभी जीवन में सच्ची शांति और ज्ञान प्राप्त होता है* *नटराज के पैरों के नीचे कोई साधारण बालक नहीं है… वह हमारे अंदर का अज्ञान, अहंकार और भ्रम है, जिसे भगवान शिव नियंत्रित कर रहे हैं ताकि हम ज्ञान के मार्ग पर आगे बढ़ सकें। 🔱* *आपके अनुसार, क्या आज के समय में भी अहंकार और अज्ञान इंसान की सबसे बड़ी समस्या है? और क्या शिव का यह संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं।*

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