
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
378 days ago
माता पार्वती के इस प्रश्न का उत्तर शिवजी ने इस प्रकार दिया कि प्रेम वह है जो बिना किसी शर्त के दिया जाता है और जिसमें दूसरों के अभाव से स्वयं का अपूर्ण होना महसूस होता है। यहाँ "राम" का उल्लेख भगवान विष्णु के अवतार भगवान राम से नहीं है, बल्कि वह प्रेम की उस अवस्था को दर्शाते हैं जब पार्वती ने शिवजी को पाने के लिए कठोर तपस्या की और शिवजी ने उनके प्रेम की परीक्षा ली, जिसके बाद उन्हें यह एहसास हुआ कि प्रेम ही सृष्टि का पूर्णता है।
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