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माता पार्वती के इस प्रश्न का उत्तर शिवजी ने इस प्रकार दिया कि प्रेम वह है जो बिना किसी शर्त के दिया जाता है और जिसमें दूसरों के अभाव से स्वयं का अपूर्ण होना महसूस होता है। यहाँ "राम" का उल्लेख भगवान विष्णु के अवतार भगवान राम से नहीं है, बल्कि वह प्रेम की उस अवस्था को दर्शाते हैं जब पार्वती ने शिवजी को पाने के लिए कठोर तपस्या की और शिवजी ने उनके प्रेम की परीक्षा ली, जिसके बाद उन्हें यह एहसास हुआ कि प्रेम ही सृष्टि का पूर्णता है।

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