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यह बहुत ही सुंदर और भक्तिपूर्ण स्तुति है। आप "लिंगाष्टकम" (Lingashtakam) के प्रसिद्ध श्लोक की पंक्तियाँ कह रहे हैं, जो भगवान शिव को समर्पित है। इस श्लोक की पंक्तियाँ और उनका अर्थ कुछ इस प्रकार है: श्लोक > चन्दनलेपितपुण्यलिङ्गं पङ्कजहारसुशोभितलिङ्गम् । > सञ्चितपापविनाशनलिङ्गं तत्प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥ > सरल हिंदी अर्थ * चन्दनलेपितपुण्यलिङ्गं: पवित्र लिंग जिस पर सुगंधित चंदन का लेप लगाया गया है। * पङ्कजहारसुशोभितलिङ्गम्: वह लिंग जो कमल के फूलों (पंकज) के हार से सुशोभित है। * सञ्चितपापविनाशनलिङ्गं: वह लिंग जो हमारे द्वारा संचित (इकट्ठा किए गए) पापों का नाश करने वाला है। * तत्प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम्: ऐसे परम कल्याणकारी सदाशिव लिंग को मैं प्रणाम करता/करती हूँ। खास बात लिंगाष्टकम की रचना आदि शंकराचार्य ने की थी। इसे सुनने या गाने से मन को बहुत शांति मिलती है, खासकर सावन के महीने में या सोमवार के दिन इसका विशेष महत्व माना जाता है।

Comments (2)

Rohit  Patel

Rohit Patel

Feb 23, 2026

सत् श्री महाकाल महाराज जी की जय 💞💞💞💞💞💞💞💞💞